शाहजहांपुर। किताबी ज्ञान के साथ बच्चों की दिनचर्या से अखबार जोड़ने की कवायद शुरू की गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक के पत्र के बाद डीआईओएस ने प्रधानाचार्यों को अखबार के पठन-पाठन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। छात्र-छात्राओं को प्रार्थना सभा में सकारात्मक खबरें पढ़कर सुनाई जाएंगी, साथ ही कठिन शब्दों के अर्थ भी बताए जाएंगे।
स्कूलों में छात्र-छात्राएं किताबी ज्ञान के बाद मोबाइल पर अपना समय व्यतीत करते हैं। उन्हें देश दुनिया की खबरों की जानकारी नहीं हो पाती। इसी क्रम में बच्चों को अखबार से जोड़ने के प्रयास शुरू किए गए हैं। डीआईओएस ने स्कूलों को जारी किए पत्र में बताया कि समाचार पत्र पढ़ने से विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान और सम सामयिक विषयों पर पकड़ मजबूत होगी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर सकेंगे।
भाषा व शब्द कोष संवर्धन व आलोचनात्मक तार्किक सोच विकसित होगी। विद्यार्थी सही-गलत में भेद करने की समझ बढ़ा सकेंगे। बताया कि अखबारों में प्रकाशित मानवीय कहानियों और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरें विद्यार्थियों को दूसरे के अनुभवों और चुनौतियों को समझने में मदद करती हैं।
डीआईओएस ने निर्देश दिए कि स्कूलों के पुस्तकालय में हिंदी व अंग्रेजी भाषा के प्रतिष्ठित समाचार पत्र मंगाएं। प्रार्थना सभा में दस मिनट का समय समाचार वाचन के लिए निर्धारित किया जाए। रोटेशन के आधार पर विद्यार्थियों को संपादकीय लेख के मुख्य अंश, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और खेल जगत की प्रमुख सकारात्मक खबरें पढ़कर सुनाई जाएं। प्रतिदिन समाचार पत्र से पांच नए व कठिन शब्दों का चयन कर उनका अर्थ प्रार्थना सभा में बताया जाए। इन शब्दों को डिस्प्ले बोर्ड या ब्लैक बोर्ड पर लिखा जाए।
स्कूल में कई वर्षों से अमर उजाला आता है। बच्चों को अखबार पढ़ाने के लिए लैब की स्थापना की है। एक कॉर्नर भी बनाया है, जिसमें बच्चे अखबार पढ़ते हैं।
- हरमीत कौर, प्रधानाचार्य, गुरुनानक पाठशाला कन्या हाईस्कूल
-
विद्यालय की लाइब्रेरी में अखबार आता है। अब बच्चों को प्रार्थना सभा में प्रमुख खबरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। अखबार पढ़ने से बच्चों का बौद्धिक विकास होगा।
-दीपक दीक्षित, प्रधानाचार्य, राजकीय हाईस्कूल बरीलालपुर निगोही
हरमीत कौर, प्रधानाचार्य। स्रोत: स्वयं