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बच्चा चोर गिरोह का खुलासा, एक बच्चा बरामद

Thu, 01 Sep 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
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बच्चा चोर गिरोह का खुलासा, एक बच्चा बरामद 
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बच्चा चुराने वाले एक नए गिरोह द्वारा पहली घटना को अंजाम दिए जाने के 13 दिनों के भीतर उसे शाहजहांपुर जीआरपी ने बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े आठ बजे तिलहर रेलवे स्टेशन के मुसाफिरखाना से धर दबोचा। गिरोह में एक महिला और एक पुरुष शामिल हैं। इनके पास से गत 18 अगस्त की आधी रात को शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से चुराया गया एक वर्षीय अली हसन को बरामद कर लिया गया। उसे उसकी मां खतीजा को सुपुर्द कर दिया गया। इन दोनों के शहर के सदर बाजार थाना क्षेत्र के मोहल्ला कर्बला चमकनी से स्थित किराए के घर से चोरी की दो बाइक बरामद हुईं, जिन पर बोलेरो और एक्सयूवी कारों का फर्जी नंबर प्लेट लगा हुआ मिला। दोनों को कोर्ट में पेश किए जाने पर 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। 
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गत 21 अगस्त को शाहजहांपुर जीआरपी थाना में खतीजा नामक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई थी कि बीती 18 और 19 के मध्य की रात स्टेशन से किसी ने उसका एक वर्षीय बच्चा चुरा लिया है, जबकि वह स्टेशन पर अपने दो साल की बेटी और बेटे के साथ ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म पर खड़ी थी। इस पर गंभीर संज्ञान लेते हुए एडीजी रेलवे गोपाल गुप्ता ने त्वरित प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया था। उसके बाद मुखबिरों के नेटवर्क को जीआरपी ने सक्रिय किया तो हाल के दिनों में बरेली-शाहजहांपुर-हरदोई और सीतापुर रूट पर एक नए गिरोह के गुपचुप ढंग से सक्रिय होने की बात सामने आई, जिसमें एक महिला के भी शामिल होने की सूचना थी। मुखबिरों ने उनके मोबाइल नंबर भी मुहैया कराए, जिनमें एक नंबर बंद जा रहा था। इसके बाद सक्रिय हुई जीआरपी टीम ने दोनों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया तो दोनों का लोकेशन कभी शाहजहांपुर, तो कभी खीरी या बंडा अथवा मथुरा मिली। बृहस्पतिवार तड़के से दोनों की लोकेशन पहले शाहजहांपुर मिली और फिर तिलहर स्टेशन पर, तो जीआरपी ने वहां डेरा डालकर दोनों को संदिग्ध हाल में गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में महिला ने अपना नाम दीपा उर्फ खुशी (32) बताया, जबकि दूसरे ने अपना नाम हरविंदर बताया। दीपा लखीमपुर खीरी के कोतवाली थाना क्षेत्र के पंडितपुरवा की निवासी है, जबकि हरविंदर बंडा थाना क्षेत्र के सुंदरपुर का निवासी है। 
गिरफ्तार होने पर दीपा और हरविंदर आपस में झगड़ने लगे एवं दीपा ने कहा कि वह हरविंदर के चलते फंस गई, जो कि अपने भाई पपिंदर के साथ लूट, चोरी और बाइक चुराने के साथ ही छिनैती भी करता है। पूछताछ में हरविंदर ने बताया कि गत दिनों उसने बंडा और सिंधौली से दो बाइक चुराई थीं और उनकी नंबर प्लेट बदलकर अपने चमकनी मोहल्ला वाले किराए के घर में रखी हुई हैं। दोनों बाइक बरामद करने के बाद पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए दोनों शातिरों को कोर्ट में पेश किया। दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 363व 364 के तहत केस दर्ज करते हुए कार्रवाई की गई। खुलासा करने वाली टीम की अगुवाई शाहजहांपुर जीआरपी थानाध्यक्ष जयशंकर सिंह ने की जबकि इसमें एसआई अजय कुमार शर्मा, कांस्टेबल राजेंद्र मिश्रा, आशीष मिश्रा,संतोष कुमार, अरविंद कुमार, कुलदीप गुप्ता और देहवती सिंह शामिल थे। 
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बेटे को वापस पाकर सीने से लगा लिया
शाहजहांपुर। जीआरपी द्वारा मोबाइल पर अपने चुराए गए बच्चे को बरामद कर लिए जाने की सूचना पर खतीजा अपने दो वर्षीय बिटिया के साथ सुध-बुध खोकर बृहस्पतिवार दोपहर सीधे शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। उसने पुलिस वालों से पहले बच्चा दिखाने को कहा। बच्चे को देखा तो वह बढ़िया कपड़े पहना हुआ था। तस्दीक करने के लिए पैंट को चढ़ाकर पैर पर घाव का निशान देखते ही बोल पड़ी कि यही अली है। हालांकि उससे पहले ही दो वर्षीया बच्ची भाई को देखते ही भैया-भैया कहकर लिपट गई थी और किसी को उसे छूने नहीं दे रही थी। 
एक लाख में हो चुका था बच्चे का सौदा  
शाहजहांपुर। बीते 19 अगस्त को चुराए गए साल भर के अली हसन को साथ लेकर दीपा ने हरविंदर के साथ मिलकर शाहजहांपुर के ही सटोरिये लाखन से 50 हजार रुपये में सौदा किया और पांच हजार रुपये पेशगी लिए। इसी बीच दीपा की अपनी घनिष्ठ सहेली मथुरा के वृंदावन निवासी रजनी से बातचीत हुई तो पता चला कि उसका एक बेटा मानसिक मंदित है और कोई बच्चा गोद लेने को इच्छुक है। फिर यह अली को साथ लेकर अच्छे रकम की लालच में वृंदावन गई और अली को अपना बेटा बताते हुए उसे सौंपा। उससे एक लाख रुपये में सौदा तय हुआ और पेशगी में चार हजार रुपये मिले। चार माह पहले दीपा का आपरेशन से जन्मा बेटा मर चुका था और इसने उस बारे में सहेली को कुछ नहीं बताया तो उसने अली को इसी का बेटा मानकर अपने पास खुशी-खुशी रख लिया था। इस बीच लाखन ने सौदा होने और पेशगी देने के बाद भी बच्चा न मिलने पर दोनों शातिरों की तलाश तेज कर दी एवं जीआरपी के संपर्क में आया तो पुलिस जांच को और गति मिली। दो दिन पहले दीपा को हरिद्वार वाले अपने संपर्की से एक नए खरीददार की जानकारी मिली जो कि मोटी रकम देने को राजी बताया गया। उसी के आधार पर वह हरिद्वार जाने को निकली, लेकिन जबरन हरविंदर उसके साथ हो लिया और तिलहर पर ट्रेन के इंतजार में दोनों धर दबोचे गए।
पति के जेल जाते ही भटके दीपा के कदम
शाहजहांपुर। दीपा उर्फ खुशी के पिता शाहजहांपुर में रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। पिता ने लखीमपुर खीरी के चंदन नामक युवक से बेटी की शादी बड़े धूमधाम के साथ की थी। करीब चार वर्ष पहले एक मर्डर केस में चंदन पुलिस के हत्थे चढ़ा और तीन साल पहले जेल भेज दिया। उसके बाद अकेली पड़ गई दीपा के कुछ ऐसी महिलाओं से संपर्क हुआ, जिन्होेंने रुपये के लालच में इसे शाहजहांपुर के काल गर्ल रैकेट में शामिल करा दिया। यहां देह व्यापार के धंधे में उतरने के बाद ग्राहक के रूप में हरविंदर और उसका भाई पपिंदर इसके पास नियमित आने लगे। उसी क्रम में यह उनके भरोसे में आ गई और उनके साथ मिलकर बीते कुछ माह शहर के कई हिस्सों में चेन और पर्स छिनैती भी की। करीब माह भर पहले हरविंदर को उसके किसी शातिर साथी ने बच्चा चोरी कर बेचने कर अच्छी रकम पैदा करने के लिए एक महिला को साथ लेकर गिरोह बनाने की सलाह दी। उसी सलाह पर हरविंदर ने दीपा के साथ यह पहली घटना की और पुलिस के हत्थे चढ़ा।
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