शाहजहांपुर। सूर्य उपासना का पर्व छठ शनिवार से प्रारंभ हो जाएगा। चार दिवसीय पर्व नहाय-खाय से शुरू होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। 27 अक्तूबर को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए खन्नौत घाट पर बड़ी संख्या में महिलाएं जुटेंगी। तट की सफाई के लिए नगर निगम ने कार्य शुरू करा दिया है।
यहां पूर्वांचल के करीब दस हजार परिवार छठ पूजा में शामिल होते हैं। विभिन्न विभागों में कार्यरत इन परिवारों के लोगों ने छठ मैया की पूजा के लिए तैयारी शुरू कर दी है। पूर्वांचल महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि चार दिवसीय पर्व का पहला दिन नहाय-खाय से प्रारंभ होगा। इसमें शुद्धता का ध्यान रखते हुए शाम की बेला में लौकी की दाल, चावल खाई जाएगी।
26 को खरना होगा। इस दिन प्रात:काल से उपवास कर शाम को गन्ने के रस की खीर खाई जाएगी और छठ का मुख्य प्रसाद ठेकुआ तैयार किया जाएगा। इसके बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू होगा। 27 अक्तूबर को पर्व के तीसरे दिन शाम की बेला में अस्तांचली सूर्य को छठ घट घाटों पर व्रती महिलाएं जुटेंगी।
इस बीच घुटने तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ घाटों पर व्रती अपनी वेदी तैयार कर साज-सज्जा के जरिये मनोरम रूप देंगी। सतीश मिश्रा ने बताया कि संध्या को डूबते सूर्य की उपसना के बाद व्रती महिलाएं घर लौट जाएंगी। उसके बाद 28 को उगते हुए सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देने के पश्चात 36 घंटे के व्रत का पारण होगा। उन्होंने बताया कि अर्घ्य देने के लिए गाय के दूध का उपयोग होता है।
शहर में कई जगह होती है छठ मैया की पूजा
पूर्वांचल के प्रमुख त्योहार छठ की पूजा शहर में कई स्थानों पर होती है। सबसे ज्यादा खन्नौत नदी पर भीड़ जुटती है। विसरात रोड स्थित हनुमत धाम पर पूजन होता है। रिलायंस थर्मल पॉवर में भी सामूहिक पूजन कार्यक्रम होता है।
खन्नौत तट की शुरू हुई सफाई
छठ पर्व को लेकर खन्नौत तट पर सफाई शुरू करा दी गई है। तट को समतल कराया गया है, जिससे आने वालों को दुश्वारियाें से जूझना नहीं पड़े। तट की सीढि़यों समेत अन्य जगहों पर रंगाई-पुताई का कार्य भी शुरू करा दिया है। शुक्रवार को महापौर अर्चना वर्मा ने खन्नौत तट का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।