पूर्वांचल के महापर्व छठ पूजा पर खन्नौत तट पर महिलाओं ने श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर महिलाओं ने परंपरागत ढंग से श्रंगार आदि कर नदी में खड़े होकर भगवान सूर्य को शाक-भाजी, फल, मिष्ठान आदि अर्पित कर अर्घ्य दिया और परिवार की सुख-संपन्नता की कामना की।
छठ पूजा के लिए लोधीपुर स्थित लालपुल केे नीचे खन्नौत तट पर शाम चार बजे से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। पुरुष और युवा बांस की बनी बंहगियों (टोकरी) में पूजन सामग्री लेकर सिर पर रखे नदी के तट पर पहुंचे। पूजा के लिए नदी के तट पर काफी सजावट की गई थी। बिजली की झालरों से पुल का सजाया गया। युवाओं ने आतिशबाजी का प्रदर्शन कर खुशियां मनाईं। वहीं, बच्चों के मनोरंजन के लिए झूलों की व्यवस्था भी की गई। लाइट से जगमगाते नदी के तट पर छठ मइया के गीत बज रहे थे।
समय के साथ बढ़ते पूर्वांचल समुदाय की उपवास रखे महिलाओं ने नदी के किनारे गन्ने लगाकर विधिवत पूजा शुरू की। बुजुर्ग महिलाओं ने बहुओं और बेटियों को छठ मइया की कहानी सुनाकर गीत भी गाए। इस अवसर पर महिलाओं ने मांगिला हम वरदान ए छठ मइया, जनकपुर नइहर दीह, बेटी सीता समान, सविता चल ले नहाय, सूरज चल ले नहाय, आंधर लोग राह रोके, सूरज होय सहाय, केरवा जो फरेला घवद से ओ पर सुग्गा मेडराय, कांची वासी के बहगियां बहगी लचकत जाए, छठ मइया ककी जय, धीरे धीरे उगो हे सूरजमल आदि गीत गाकर खुशियां मनाईं।
महिलाओं ने नदी में खड़े होकर गाय के दूध और गंगाजल से अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य दिया और फलाहार और शाकाहार अर्पित कर मनौती मांगी। नवविवाहिताओं में पूजा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।