शाहजहांपुर। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच सीजफायर होने से कारोबार के पटरी पर लौटने की उम्मीद है। जंग की वजह से बासमती चावल, प्लाईवुड और प्लास्टिक के उत्पादों तक पर फर्क पड़ा है। उद्यमियों के अनुसार, युद्ध बंद होने के एक महीने का समय स्थिति सामान्य होने में लगेगा।
जंग के चलते सिलिंडर से लेकर घरेलू उपयोग वाली वस्तुओं तक पर असर नजर आ रहा है। प्लास्टिक के उत्पाद महंगे हो गए। वहीं, बासमती चावल का निर्यात भी विदेश में बंद हो गया है। केमिकल पर महंगाई के चलते प्लाईवुड का कारोबार भी धीमा पड़ गया है। जंग की आंच आमजन तक पहुंची और खानपान की वस्तुएं भी महंगी हो गईं। सीजफायर होने के बाद व्यापारियों ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि जंग के चलते कारोबार पूरी तरह से हाशिये पर पहुंच गया है। युद्ध थमने पर ही कारोबार पटरी पर पहुंच सकेगा।
20 से 30 प्रतिशत ही प्लास्टिक पाइप उत्पादन फोटो 2
-युद्ध के चलते 20 से 30 प्रतिशत ही प्लास्टिक के पाइप का उत्पादन हो पा रहा है। कई इकाइयां तो बंद तक पड़ी हैं। सीजफायर की घोषणा के बाद प्लास्टिक के दाने पर चार रुपये कम हुए हैं। जंग बंद होने के बाद सब सामान्य हाेने में एक महीने का समय लग सकता है।
- गुरजीत सिंह, मंडलीय चेयरमैन आईआईए
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लगभग दस हजार टन बासमती डंप होने का अनुमान
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-जिले से बासमती चावल गुजरात में निर्यात होता है। वहां से विदेशों में भेजा जाता है। युद्ध के चलते निर्यात बंद है। संभावना है कि जिले में करीब दस हजार टन चावल डंप होगा। युद्ध बंद होने पर ही निर्यात में तेजी आएगी और फिर से कारोबार पहले की तरह शुरू हो सकेगा।
- नवनीत प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
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युद्ध विराम जैसी स्थिति लग नहीं रही
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-युद्ध थमने की सूचना पर प्लाईवुड में प्रयोग होने वाले केमिकल के दाम में 25 से 30 प्रतिशत कमी आई थी। बृहस्पतिवार को दाम फिर से चढ़ने लगे हैं। जहाज नहीं निकल पाने के कारण दिक्कत बरकरार है। अभी पूरी तरह से युद्ध विराम जैसी स्थिति नहीं लग रही है।
- अशोक अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए
गुरजीत सिंह मोगा।