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पहले ही हो गया था जीत हार का फैसला

Mon, 09 Mar 2015 11:49 PM IST
शाहजहांपुर
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कैंट बोर्ड में उपाध्यक्ष बनने का फैसला पहले ही हो गया था। बस, कैंट बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर की मुहर लगना ही बाकी रह गया था, जो सोमवार को पूरा हो गया।
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इस बार का कैंट बोर्ड के वार्ड मेंबरों के चुनाव में काफी विवाद होते रहे। 11 जनवरी को हुए वार्ड मेंबरों के चुनाव में जीत-हार का फैसला होने के बाद से ही उपाध्यक्ष की जीत हार का फैसला हो गया था। दरअसल ये तय था कि जो प्रत्याशी सात वार्ड मेंबरों में तीन का समर्थन हासिल कर लेगा, वही चुनाव जीतेगा। अवधेश दीक्षित के पक्ष में रेखा देवी, उर्मिला देवी और मुकेश थे, वहीं निशांत के पक्ष में गजेंद्र गंगवार और नीलम वर्मा थीं।
इस आधार पर निशांत एक वोट से चुनाव हार रहे थे। इसी वजह से निशांत ने उर्मिला देवी पर फर्जी तरीके से चुनाव लड़ने का आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत की थी। एसपी ने जब जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई थी। एसपी ने कार्रवाई के लिए जांच आख्या कैंट बोर्ड के सीईओ को भेज दी थी। इसके बाद से निशांत ब्रिगेडियर और सीईओ से उर्मिला पर कार्रवाई करने की मांग करते रहे लेकिन अधिकारियों ने उनकी नहीं सुनी। यदि उर्मिला देवी  के खिलाफ हुई शिकायत के आधार पर कार्रवाई हो जाती तो उनकी जह जीतने वाले वार्ड मेंबर से उपाध्यक्ष की जीत-हार तय होती।
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‘उर्मिला देवी पर लगाए गए सारे आरोप गलत हैं। निशांत के तमाम आरोपों का मैंने तो जवाब तक नहीं दिया। मेरा उद्देश्य कैंट क्षेत्र को चमन करना है। इससे पहले भी किया और इस कार्यकाल में भी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखनी हैं।’
- अवधेश दीक्षित, नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड

‘एसपी के द्वारा कराई गई जांच में उर्मिला देवी को पूर्णत: दोषी पाया गया। इसके बावजूद भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। यदि ऐसा होता तो भाजपा के प्रत्याशी जीत नहीं होती।’
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- निशांत यादव, वार्ड मेंबर, कैंट बोर्ड 
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