बगैर अनुमति निर्माण कराए जाने पर कराया जाएगा ध्वस्त
शहर में विनियमित क्षेत्र की अनदेखी से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में भी मकानें और दुकानें बनकर तैयार हो गई हैं। नदी के मुहाने तक मकान बने हुए हैं। वहीं, कृषि भूमि का यूज बदलवाए बगैर लोगों ने प्लॉटिंग कर दी है। जिम्मेदारों के कार्रवाई न करने से लगातार अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। प्राधिकरण की स्थापना होने से ऐसे निर्माण पर लगाम लगेगी। बगैर अनुमति निर्माण कराने पर ध्वस्त कराया जाएगा। इसको लेकर लोगों को जागरूक भी
किया जाएगा।
बगैर नक्शा पास कराए दूसरी मंजिल पर भी नहीं होगा निर्माण
विकास प्राधिकरण के गठन से पूर्व बने निर्माण पर यथास्थिति रहने की संभावना है। विकास प्राधिकरण बनने के बाद अगर किसी को दूसरी मंजिल पर भी निर्माण कराना है तो इसके लिए नक्शा पास कराना होगा। कृषि भूमि पर निर्माण नहीं कराया जा सकेगा। इसके लिए पहले प्राधिकरण से नक्शा पास कराने की प्रक्रिया करनी होगी। कृषि भूमि को आवासीय भूमि में तब्दील कराना होगा। शहर के कई क्षेत्रों में कृषि भूमि पर कॉलोनियां बनी हुईं हैं। इनके विषय में प्राधिकरण ही निर्णय करेगा।
नौ मीटर की सड़क, पार्क के लिए छोड़नी होगी जगह, वरना शिकंजा
विशेषज्ञों के मुताबिक विकास प्राधिकरण में नई कॉलोनियां मानक के अनुसार बनेंगी। कॉलोनी में कम से कम नौ मीटर की सड़क होगी। मास्टर प्लान के हिसाब से जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें 20 प्रतिशत जगह में पार्क (हरियाली के लिए), 20 प्रतिशत में पार्किंग, गेट पर सुंदरीकरण के साथ अन्य सुविधाएं देनी हाेंगी। इन सुविधाओं में करीब 45 प्रतिशत भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि 55 प्रतिशत जमीन पर ही आवासों का सुनियोजित तरीके से निर्माण कराया जाएगा।
डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विकास प्राधिकरण की मंजूरी मिल गई है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही विकास प्राधिकरण अस्तित्व में आ जाएगा। शासन की ओर से उपाध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी। प्राधिकरण होने से शहर का सुनियोजित रूप से विकास हो सकेगा।
ले-आउट की मंजूरी के बाद शुरू कराना होगा कार्य
औद्योगिक और व्यावसायिक भवनों का निर्माण बगैर ले-आउट की मंजूरी के नहीं कराया जा सकेगा। ले-आउट के मुताबिक कार्य नहीं होगा तो प्राधिकरण के अधिकारी हस्तक्षेप कर कार्रवाई करेंगे। व्यावसायिक भवन के लिए भी मानक पूरे करने होंगे। कुल स्थान के 40 प्रतिशत क्षेत्र में ही भवन बनाया जा सकेगा। पार्किंग के लिए जगह छोड़नी होगी। निश्चित संख्या में ही फ्लोर बनाए जा सकेंगे।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की होगी नियुक्ति
विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष कमिश्नर होते हैं। उपाध्यक्ष के लिए आईएएस अधिकारी, सचिव के लिए पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। फाइनेंस कंट्रोलर को भी तैनात किया जाएगा। शहर को सेक्टर में बांटा जाएगा। इसमें प्रत्येक सेक्टर में एक्सईएन और जेई की तैनाती होगी। इसका बायलॉज तैयार होगा। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल अस्थायी तौर पर प्राधिकरण के लिए कार्यालय तैयार किया जाएगा।