शाहजहांपुर। जीवनशैली बदलने से गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा सहन नहीं कर पा रही हैं। जागरूकता के अभाव में गर्भावस्था के दौरान कम श्रम करने के कारण महिलाओं में सामान्य प्रसव कराना मुश्किल हो रहा है। एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 27 प्रतिशत ऑपरेशन से प्रसव (सिजेरियन) बढ़ गए हैं। इस वर्ष आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान है।
अजीजगंज स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में जनपद के अलावा आसपास जिलों की गर्भवती महिलाएं प्रसव कराने के लिए आती हैं। सीएचसी-पीएचसी पर बेहतर व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण यहां प्रसव कराने के बजाय अधिकतर महिलाओं को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
वर्ष 2023 व 2024 के आंकड़ों पर नजर डालें तो सामान्य प्रसव के बजाय ऑपरेशन से प्रसव की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। एक वर्ष में 27 प्रतिशत ऑपरेशन से प्रसव का ग्राफ बढ़ गया है। इसमें शहरी क्षेत्र की महिलाएं सबसे ज्यादा हैं।
प्राचार्य डॉ.राजेश कुमार बताते हैं कि महिलाओं की जीवन शैली बेहतर नहीं रह गई। उनमें ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ ही कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त प्रसव के दौरान दर्द सहन कर पाना मुश्किल होता है। सहनशक्ति की कमी और गर्भावस्था के दौरान कम श्रम करने से सामान्य प्रसव नहीं हो पाता है।
खतरा नहीं लेना चाहते परिजन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भधारण करने के बाद महिलाएं कठिन परिश्रम वाला कार्य नहीं करती हैं। जागरूकता के अभाव में परिवार के लोग भी खतरा नहीं लेना चाहते हैं। चिकित्सक भी सलाह देते हैं। ऐसे में ऑपरेशन करा देते हैं।
वर्ष प्रसव सिजेरियन
2023 5883 701
2024 5175 890
2025 2590 550
नगर के अलावा ग्रामीण इलाकों से आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं को लेकर आती हैं। मेडिकल कॉलेज में गंभीर गर्भवती महिलाएं ही आती हैं। जरूरी मामलों में ही ऑपरेशन किया जाता है। महिलाएं शुरू से जागरूक हो जाएं तो सामान्य प्रसव हो सकता है।
- डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज