निगोही (शाहजहांपुर)। कस्बे के मोहल्ला गांधीनगर में सराफा व्यापारी उमेश कुमार गुप्ता उर्फ गुड्डू (62) की बीती रात लखनऊ पुलिस की दबिश के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मकान की छत से गिरकर मौत हो गई। सुबह शव मिलने पर परिजनों ने छह पुलिसकर्मियों पर रंजिशन छत से फेंकने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसके बाद पत्नी संतोष की तहरीर पर निगोही थाने में पुलिसकर्मियों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट से मृत्यु होना सामने आया है।
लखनऊ में पिछले साल 21 दिसंबर को मलिहाबाद थाने से थोड़ी दूरी पर स्थित फजल ज्वेलर्स के शोरूम का शटर काटकर करीब एक करोड़ रुपये के जेवर की चोरी हुई थी। मामले में निगोही के रहने वाले फते सिंह, लोकी और रामपाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने चोरी के जेवर उमेश को बेचे हैं। इसके बाद से पुलिस उनकी तलाश में थी।
इस मामले में लखनऊ की अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। वारंट तामील कराने के लिए मलिहाबाद थाने से उपनिरीक्षक अश्वनी के साथ तीन सिपाही निगोही के दो सिपाहियों को लेकर बुधवार रात करीब ढाई बजे उमेश के घर पहुंची। पत्नी संतोष का आरोप है कि खटखटाने पर दरवाजा खोलते ही अंदर घुसे पुलिसकर्मी उमेश को पकड़कर छत पर ले गए। वहां से छत के रास्ते उमेश बचते हुए पड़ोस में अपने भाई के निर्माणाधीन मकान की छत पर पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने नीचे फेंक दिया। इससे उनकी मौत हो गई। साथ ही घर की तलाशी लेकर पुलिसकर्मी जेवर और नकदी भी साथ ले गए।
संतोष का आरोप है कि पुलिसकर्मी उनके पति को धमकाकर उगाही करते थे। उन्होंने उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की थी। इस वजह से पुलिसकर्मी रंजिश मानने लगे थे। इसलिए हत्या की गई है।
मलिहाबाद पुलिस के सहयोग में निगोही पुलिस साथ उमेश के घर गई थी। घर में उनके मौजूद नहीं होने पर वारंट तामील नहीं हो सका। सुबह उनकी संदिग्ध हालात में मौत की सूचना मिली है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। -सौरभ दीक्षित, एसपी, शाहजहांपुर
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मांगें रखकर छह घंटे बाद उठने दिया शव, शाम को फिर लेने से किया मना
निगोही। सराफा व्यापारी उमेश गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बुधवार को दिनभर तनाव की स्थिति बनी रही। परिजन पुलिस पर हत्या और घर से जेवर-नकदी लूटने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। सुबह करीब छह घंटे तक शव नहीं उठने दिया। दोपहर करीब 12 बजे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समझाने के बाद शव पोस्टमाॅर्टम के लिए भेजा गया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाया गया तो परिजनों ने उसे लेने से इन्कार कर दिया। तीन मांगों को लेकर करीब दो घंटे तक शव एंबुलेंस में ही रखा रहा।
परिजनों के हंगामे का पता चलने पर सीओ सदर शुभम वर्मा, सीओ पुवायां प्रवीण मलिक और निगोही व सिंधौली का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। सीओ सदर और इंस्पेक्टर निगोही राजीव तोमर परिजनों को समझाते रहे। पुलिस अधिकारी लूट की घटना से इन्कार करते हुए तहरीर से लूट संबंधी शब्द हटाने की गुजारिश करते रहे, लेकिन परिजन अपनी मांग पर अड़े रहे।
बाद में पूर्व एमएलसी अमित यादव रिंकू और एसपी सिटी देवेंद्र कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया। इसके बाद करीब छह घंटे बाद शव उठने दिया गया। इसलिए एफआईआर में यही लिखा गया कि पुलिसकर्मी तलाशी के दौरान जेवर निकालकर ले गए।
शाम करीब साढ़े पांच बजे पोस्टमार्टम के बाद शव एंबुलेंस से घर पहुंचा तो बेटी मोनिका गुप्ता और दामाद आयुष गुप्ता ने शव लेने से इन्कार कर दिया। उनका आरोप था कि पुलिस अपनी मर्जी से शव उठाकर ले गई। उन्होंने मजिस्ट्रेट की निगरानी में पैनल से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने और विवेचना मजिस्ट्रेट से कराने की मांग रखी।
मांगों को लेकर शव करीब दो घंटे तक एंबुलेंस में ही रखा रहा। एसपी सिटी और सीओ सदर ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद शव एंबुलेंस से उतारा गया। एसपी सौरभ दीक्षित भी थाने से पूरे मामले पर निगरानी बनाए रहे।
मुकदमे से नाम निकालने के लिए दो लाख रुपये लेने का आरोप
उमेश की पत्नी संतोष कुमारी ने आरोप लगाया कि उनके पति को जानबूझकर मारा गया है। घर से जेवर व नकदी भी ले गए हैं। उनका यह भी आरोप था कि मुकदमे से नाम निकालने के नाम पर पूर्व में मलिहाबाद पुलिस ने दो लाख रुपये लिए थे। उमेश की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। पत्नी, 12 वर्षीय बेटे अनुराग, भाई राकेश, संतोष और अवनीश का रो-रोकर बुरा हाल है।
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छह महीने पहले पुलिस ने की थी पूछताछ
परिजनों के अनुसार चांदी के जेवर खरीदने के आरोप में पुलिस करीब छह महीने पहले उमेश गुप्ता को पकड़कर निगोही थाने लाई थी। सत्तारूढ़ दल के नेताओं के पहुंचने पर जांच में सहयोग करने की शर्त पर उन्हें छोड़ दिया गया। बाद में पुलिस ने उनका नाम आरोपियों के साथ जोड़ दिया। इसकी जानकारी होने पर उमेश ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी, जो 30 जुलाई को खारिज हो गई। पुलिस के अनुसार अदालत से वारंट जारी होने पर उमेश दो बार न्यायालय गए और जमानत के लिए तीसरी बार फिर अर्जी दी थी। उमेश बिना हाजिर हुए जमानत हासिल करना चाह रहे थे। वहीं वारंट जारी होने पर बुधवार रात मलिहाबाद थाने से उपनिरीक्षक अश्वनी के साथ तीन सिपाही निगोही के दो सिपाहियों को लेकर पहुंच गए।
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भागने के दौरान छत से गिरने की आशंका
उमेश के मकान के आसपास ही परिवार के अन्य सदस्यों के मकान हैं और उनकी छतें आपस में जुड़ी हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रात में पुलिस दबिश के दौरान उमेश बचने के लिए भागे। तभी छत से गिरने से उनकी मौत हो गई। बुधवार सुबह उनका शव बड़े भाई राकेश गुप्ता के निर्माणाधीन मकान के गेट पर पड़ा मिला। सड़क की सफाई करने पहुंचे कर्मचारी ने खून बहता देखकर आसपास के लोगों को सूचना दी। इसके बाद परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर में चोट लगने से मौत होने की पुष्टि हुई है।
निगोही में घटना के बाद गमजदा परिजन को लेकर जाता युवक। संवाद
निगोही में घटना के बाद गमजदा परिजन को लेकर जाता युवक। संवाद
निगोही में घटना के बाद गमजदा परिजन को लेकर जाता युवक। संवाद
निगोही में घटना के बाद गमजदा परिजन को लेकर जाता युवक। संवाद