शाहजहांपुर। स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ है। वर्ष 2022 में घर के नजदीक ही स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रदेश में पांच हजार नए उपकेंद्र खोले जाने थे। जनपद में इनकी संख्या 86 थी। इसके लिए किराये के भवन की तलाश शुरू की गई, जो मिले नहीं। इसके बाद भी इन उपकेंद्रों के लिए सामान खरीदकर अफसरों ने बजट ठिकाने लगा दिया।
कुछ उपकरण एएनएम को भी आवंटित कर दिए गए। केंद्र नहीं होने की वजह से वे इन्हें घर लेकर चली गईं। बाकी उपकरण सीएचसी के गोदाम में भरे मिले थे। जानकार बताते हैं कि उपकेंद्र पर बच्चों व बड़ों के लिए वजन व बीपी मशीन, ग्लूकोमीटर, हीमोग्लाेबिन मशीन, स्टेथोस्कोप, फीटोस्कोप, थर्मामीटर, डिजिटल घड़ी, हब कटर, स्टैडियोमीटर, निश्चय किट, यूरिन कलेक्शन कप, बैनर, दस्ताने आदि की खरीद की गई थी। औषधियां, यूवीएचएसएनडी के लिए जरूरी किट भी खरीदी गई थीं।
गर्भवती की जांच व होना था टीकाकरण
-प्रत्येक उपकेंद्र पर एक एएनएम और पुरुष मल्टीपर्पज वर्कर की तैनाती की जाती है। स्टाफ के अभाव में एएनएम ही नियुक्त होती हैं। हर महीने उन्हें आठ सेशन करने होते हैं। गर्भवती की जांच, बच्चों का टीकाकरण आदि का कार्य होता है। नियम के अनुसार, एएनएम को उपकेंद्र पर निवास भी करना चाहिए।
कार्रवाई के लिए शासन के निर्देश का इंतजार
जिला पंचायत अध्यक्ष ममता यादव ने स्वास्थ्य विभाग में सामान खरीद में गड़बड़ी की डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह से शिकायत की थी। डीएम ने सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह की अध्यक्षता में समिति बनाकर मामले की जांच कराई थी। इसके बाद घोटाले का खुलासा हुआ। पुराने जिला अस्पताल और ददरौल सीएचसी में सामान भरा मिला था। बगैर जिला स्वास्थ्य समिति की अनुमति के गुणवत्ता विहीन सामान एमआरपी से कई गुना ज्यादा रेट पर खरीदा गया। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने पूरा घोटाला सौ करोड़ के आसपास होने का अनुमान व्यक्त किया है। मामले में तत्कालीन सीएमओ डॉ. आरके गौतम, एसीएमओ डॉ. गोविंद स्वर्णकार, प्रधान सहायक संजय सिंह, लेखा प्रबंधक चंद्र प्रकाश पांडेय, प्रशासनिक अधिकारी राम किशोर, एसीएमओ डॉ. मनोज मिश्र पर कार्रवाई की संस्तुति की है। पूरी रिपोर्ट प्रमुख सचिव चिकित्सा और स्वास्थ्य को भेजी जा चुकी है। डीएम ने बताया कि शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों के निलंबन के साथ ही रिकवरी की कार्रवाई भी होगी। शासन से तत्कालीन सीएमओ के तीन वर्ष के कार्यकाल में खरीदे गए सामान की जांच कराने का आग्रह किया गया है।