कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की वार्डेन बीएसए के हुक्म की नाफरमानी कर रही हैं। बीएसए के लाख कहने के बावजूद सोमवार तक किसी भी वार्डेन ने विद्यालयों में बायोमैट्रिक अटेंडेंस मशीन लगाने के लिए क्रय आदेश जमा नहीं किया है और न ही किसी विद्यालय में अटेंडेंस मशीन ही लग सकी।
जिले के कस्तूरबा स्कूलों में कार्यरत स्टॉफकर्मी निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर मिले थे। साथ ही इस मामले की कई शिकायतें भी बीएसए की जानकारी में आई थीं। इस पर कस्तूरबा स्कूलों की स्थिति सुधारने के नीयत से विद्यालयों में बायोमैट्रिक अटेंडेंस यंत्र लगाने के लिए कहा गया है। इसके लग जाने से विद्यालय में स्टॉफकर्मियों और छात्राओं की उपस्थिति की सही गणना हो सकेगी।
इस संबंध में बालिका शिक्षा की जिला समन्वयक इंद्रेश सिंह का कहना है कि उन्हें सोमवार तक किसी विद्यालय में बायोमैट्रिक यंत्र खरीदने की जानकारी नहीं है। न ही इसके लिए किसी वार्डेन ने क्रय आदेश दिया है। इसके लिए बरती जा रही लापरवाही साफतौर पर सिद्घ करती है कि कस्तूरबा विद्यालयों की वार्डेन बायोमैट्रिक अटेंडेंस लगाने में रुचि नहीं दिखा रही हैं।
नेतागीरी का लिया जा रहा सहारा
तिलहर क्षेत्र के कस्तूरबा विद्यालयों में कार्यरत एक शिक्षिका के पति सपा नेता हैं। वह विद्यालयों में बायोमैट्रिक लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसके लिए वह पार्टी के नेताओं से सिफारिश कराकर इसे रुकवाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वह शिक्षिका विद्यालय समय से जाने में रुचि नहीं रखती हैं।
‘बायोमैट्रिक अटेंडेंस मशीन खरीदकर कस्तूरबा विद्यालयों में लगाने के निर्देश सभी वार्डेन को दिए जा चुके हैं। इसका अनुपालन जल्द करने के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।’
- राजेश वर्मा, बीएसए