सुमित घर से लोहे का पाइप लेकर मंदिर पहुंचा। वहां उसने पहले दोनों साधुओं का भरोसा जीतने के लिए उनके पास करीब 30 से 40 मिनट तक सोने का नाटक किया। दोनों के गहरी नींद में जाने के बाद उसने पहले बाबा गोपालदास और फिर दिव्यांग बाबा बिहारीदास के सिर पर पाइप से वार किया। दोनों की हत्या करने के बाद आरोपी ने पूजा सामग्री में मौजूद घी और कपूर आदि की मदद से शवों को आग लगा दी।
पुलिस के अनुसार, वह शवों के जलने तक वहां मौजूद रहा। जब उसे यकीन हो गया कि दोनों की मौत हो गई है तो घर लौटकर सो गया। पहले पुलिस को लगा था कि आग गोपालदास की बाइक से पेट्रोल निकालकर लगाई गई है। जांच करने पर बाइक में पेट्रोल पूरा मिला। इसके बाद सामान जांचा तो घी-तेल वगैरह न मिलने पर उसी से आग लगाने की बात सामने आई। उसने लोहे का पाइप घर के पास घूरे में फेंक दिया था जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
सीताराम का जवाब न मिलने पर सशंकित हुए ग्रामीण
खुदागंज। सुबह वहां से गुजरने वाले लोग दोनों साधुओं से सीताराम-सीताराम कहते हुए आगे बढ़ते थे। बृहस्पतिवार सुबह करीब छह बजे जब ग्रामीण वहां से गुजरे और सीताराम कहा तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इस पर ग्रामीणों को आशंका हुई तो वे अंदर की ओर गए। वहां पर धुआं उठते देखकर और साधुओं को वहां न पाकर वे लोग वापस आए और अन्य लोगों को इसके बारे में बताया। इसी बीच गांव का रहने वाला दृगपाल सफाई करने वहां पहुंचा तो वहां का नजारा देखकर स्तब्ध रह गया। सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों के अनुसार दोनों तख्त करीब दो मीटर की दूरी पर पड़े थे और आग से बुरी तरह जल चुके थे।
40 वर्ष से सेवा कर रहे बाबा गोपालदास
ग्रामीणों के अनुसार बाबा गोपालदास करीब 40 साल पहले सुथा गांव आए थे। वह कथावाचक भी थे और आसपास के गांवों में कथा सुनाने जाते थे। गोपालदास मूल रूप से अजीजगंज क्षेत्र के रहने वाले थे। उनकी पत्नी लज्जावती का 20-25 साल पहले निधन हो चुका था। उनकी एक बेटी सरस्वती है, जिसकी शादी हो चुकी है। उनके भाई राम दुलारे, रामकिशोर और रामनिवास हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गोपालदास के पास अक्सर रुपये रहते थे और वह अंगूठियां भी पहनते थे। वहीं, बाबा बिहारीदास गांव के ही रहने वाले थे और गोपालदास के चेले थे।
तकरीबन दस साल से वह संन्यासी हो गए थे। उन्हें पैरालिसिस हो गया था जिसकी वजह से वह डंडे के सहारे चलते थे। वह कुछ दूरी पर यज्ञशाला में बने मंदिर में रहते थे। बुधवार शाम करीब साढ़े छह बजे वह खाना लेकर गोपालदास के पास सोने गए थे। बिहारीदास पांच भाई थे। उनके भाई श्रीकृष्ण और राजवीर गांव में रहते हैं, जबकि ओमवीर और बुधपाल बाहर रहकर कामकाज करते हैं। हत्याकांड की सूचना मिलने पर उनकी बहनें उर्मिला देवी और सुशीला भी पहुंच गईं। परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया।
बिहारीदास को धमकाता था सुमित
ग्रामीणों का कहना है कि सुमित आए दिन मंदिर पहुंचता था और बिहारीदास से वहां से चले जाने की बात कहता था। घटना वाली शाम भी उसके मंदिर पहुंचने और वहां मौजूद लोगों को धमकाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने सुमित पर पहले भी उपद्रव करने, मारपीट और आगजनी के आरोप लगाए हैं। बुधवार की रात उसने अपने परिजनों से भी मारपीट की थी। इसके बाद परिवार के सदस्य घर छोड़कर गांव में ही परिचितों के यहां चले गए थे। हत्या करने के बाद वह गोपालदास का मोबाइल भी उठा लाया था।
पत्नी बोली: जैसा किया, वैसा भरेगा
वारदात के बाद गांव में सुमित के परिवार के लोग इधर-उधर चले गए थे। घर में केवल उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे थे। पत्नी नीलम ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। वह केवल इतना बोली कि जो जैसा करेगा, उसे वैसा ही भरना पड़ेगा।
मंदिर आस्था का केंद्र, शिवतेरस पर लगता है मेला
सुथा गांव स्थित मंदिर लंबे समय से आसपास के ग्रामीणों की आस्था का केंद्र रहा है। यहां शिवतेरस के अवसर पर मेला भी लगता है। इसके अलावा भी वर्षभर तमाम धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। इसमें आसपास के गांवों के ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
रोटी खा लेता तो शायद नहीं होती घटना
आरोपी की पत्नी नीलम के अनुसार उसका बरेली के डॉ. वीके श्रीवास्तव से मानसिक उपचार चल रहा था। रात में उसे दवा खाने में दी जाती थी। पत्नी का कहना है कि घटना वाली रात सुमित ने खाना नहीं खाया था। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसने घर की चौखट तोड़ दी। उसका कहना है कि अगर वह रोटी खा लेता तो शायद यह घटना नहीं होती।
आरोपी पर सात मुकदमे दर्ज
पुलिस के अनुसार सुमित पर सात मुकदमे दर्ज हैं। इनमें तीन मामले आर्म्स एक्ट के हैं। दिसंबर 2025 में आर्म्स एक्ट के मामले में जेल गया था और अगस्त में हरियाली तीज के दौरान पिता उसकी जमानत कराकर घर लाए थे।
तोड़फोड़ और आगजनी की आदत का दावा
-ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि सुमित पहले भी तोड़फोड़ और आगजनी करता रहा है। आरोप है कि पिछले साल उसने शिक्षामित्र कौशलेंद्र की कार और एक बाइक में आग लगा दी थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी।
ग्रामीणों के अनुसार वह कई बार लोगों के दरवाजे और चौखट तोड़ चुका था। जानवरों के साथ क्रूरता के भी उस पर आरोप हैं। पिछले साल उसने एक बकरी के कई टुकड़े कर दिए थे। वर्ष 2020 में एक पड्डे को मारने और दूसरे की आंख फोड़ने का भी आरोप लगा था। पड्डे की मौत के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने की बात सामने आई है।
बुजुर्गों को डराने-धमकाने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि सुमित अक्सर बुजुर्गों से मारपीट और उन्हें धमकाता था। उसके व्यवहार से लोग भयभीत रहते थे, इसलिए कई घटनाओं में शिकायत नहीं की गई। पुलिस पूछताछ में आरोपी के जेल में भी अन्य बंदियों से विवाद होने की बात सामने आई है। बंदियों ने उसे पीटा भी था।