कई दिनों से लग्जरी गाड़ियों में सैर कर रहे और दिन भर मुफ्त का माल तोड़ने के बाद शाम को लालपरी का भी जुगाड़ हो रहा था, लेकिन चुनाव के बाद आज किसी ने पूछा तक नहीं। कई नेताओं ने तो कार्यकर्ताओं का फोन तक रिसीव नहीं किया। चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही नेताओं ने कार्यकर्ताओं को खासी अहमियत देनी शुरू कर दी थी। उन्हें खासमखास बताते हुए गाड़ियां मुहैया कराई गई थीं। दिन भर लग्जरी गाड़ियों में घूमना, मुफ्त के भोजन पानी की व्यवस्था और शाम को सुरा की व्यवस्था। भैया मौजां ही मौजां थी। लगे हाथों चुनावी गाड़ियों से रिश्तेदारी में भी मौज मार ली। मुफ्त में घूमे और गाड़ी का रौला भी गांठा। चुनाव निपट गया, अब कोई पूछने वाला नहीं दिख रहा। कार्यालयों के चक्कर लगाए वो भी बंद मिले। पैदल भी चलना पड़ा और हलक सूख गया। ऐसे ही एक कार्यकर्ता से बात हुई तो बोला कि भैया अब कौन सो इलक्शनु आउन वालो हइ। बताया कि अगले साल नगर निकाय के चुनाव हैं, तो मायूस हो गए बोले, उहिमा इत्तो मजा थोड़उ अइही।