सावन के अंतिम सोमवार को शहर में निकली भगवान भोलेनाथ बारात कई मायने में ऐतिहासिक रही। बारात देखने के लिए उमड़ी भीड़ से सड़कें पट गईं, वहीं बारातियों के रूप में उमड़े जनसैलाव को देखकर लोग हतप्रभ रह गए। डीजे, बैंडबाजे, आकर्षक झांकियों से साथ निकली बारात से पूरा शहर ही मानो शिवमय हो गया।
गुलशन कुमार सेवा समिति के बैनर तले निकली शिव बारात यूं तो पिछले कई वर्षों से निकल रही है, लेकिन इस बार की भीड़ ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। दोपहर बाद से बारात देखने के लिए सड़के किनारे और दुकानों-मकानों की छतों पर महिलाएं, बच्चे और युवतियां एकत्र होने शुरू हो गए थे। समिति के अध्यक्ष किशन कुमार के नेतृत्व में बारात की तैयारियां भी महीने भर से चल रही थीं, पूरे शहर में होर्डिंग्स से बारात का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। सोमवार को बारात की सुरक्षा के लिए कई थानों की पुलिस लगाई गई।
बारात में सबसे आगे भैंसे पर यमराज के रूप में झांकी थी, उसके पीछे नंदी पर भगवान शिव की झांकी रही। श्री गणेश जी की प्रतिमा के पीछे विशालकाय शिवलिंग और बाद में कई डीजे की गाड़ियां थीं। डीजे पर बजे रहे भजनों पर हजारों युवा भांग के नशे में धुत डांस कर रहे थे। बारात का स्वागत करने के लिए जगह-जगह भांग के स्टाल, पानी और जलपान की व्यवस्था की व्यवस्था की गई। भांग की ठंडाई पीने के लिए स्टालों पर युवाओं की होड़ मची थी। कंपटीशन के आधार पर लोग ठंडाई पी रहे थे।
चौक, घंटाघर, बहादुरगंज, सदर बाजार होते हुए बारात रात दस बजे के बाद बाबा विश्वनाथ मंदिर (समापन स्थल) पहुंच सकी। भीड़ का आलम यह था कि सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं थी। वहीं दुकानों के चबूतरों, छतों पर भी लोग बारात देखने के लिए देर रात तक डटे रहे। बारात को भव्य बनाने में जहां डीजे का योगदान रहा, वहीं, राधा-कृष्ण, हनुमान जी, शंकर-पार्वती, मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप, भारत माता की झांकी भी पीछे नहीं रहीं। बारात की चर्चा दूसरे दिन भी जगह-जगह होती रही। सभी इसे ऐतिहासिक भीड़ वाला धार्मिक अनुष्ठान बता रहे थे। बारात में रजत सिंह, आशीष गुप्ता, गिरीश सक्सेना, मनीष गुप्ता, मोहित कुमार, गौरव सिंह, नरेंद्र त्यागी, अमित गुप्ता, राजीव कुमार, प्रदीप सक्सेना, देवेश ठाकुर, बैकुंठनाथ अग्रवाल, रोहित अरोरा आदि का योगदान रहा।