शाहजहांपुर। कार्तिक मेला ढाईघाट पर स्नान इस बार पहले जितना आसान नहीं होने जा रहा। कोलाघाट में रामगंगा नदी पर निर्माणाधीन पैंटून पुल बनना संभव नहीं दिख रहा है। इसकी वजह रामगंगा में बहाव सामान्य से अधिक होना है। नदी की मुख्य धारा में अभी चार पैंटून लगने शेष हैं, इस कारण पैंटून लगाने पर उनके बहने या पुल को क्षति पहुंचने की आशंका बनी है।
पिछले वर्ष नवंबर में पिलर धंसने से क्षतिग्रस्त हुए कोलाघाट पक्के पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद उसके पिलर की तकनीकी जांच के फेर में पुल पर केवल पैदल और दोपहिया वाहनों को निकलने की अनुमति है। वर्षा के बाद बनाए जा रहे पैंटून पुल के नहीं बनने की दशा में शाहजहांपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बरेली, हरदोई आदि जिलों के श्रद्धालुओं का ढाईघाट पहुंचना कठिन होगा, क्योंकि उनके आने का एकमात्र मार्ग कोलाघाट होकर ही जाता है। पैंटून पुल निर्माण में लगे लोक निर्माण विभाग के जलालुद्दीन ने बताया कि पैंटून पुल के पास पानी की गहराई अधिक होने से निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है।
जिला पंचायत ने तेज की मेले की तैयारी
जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा ढाईघाट मेला क्षेत्र का निरीक्षण किए जाने के बाद वहां बाढ़ और बारिश से क्षतिग्रस्त हुए मार्ग बनाने को भूमि समतलीकरण का काम शुरू करा दिया गया है। दो वर्ष से कोरोना व लॉकडाउन से ढाई घाट मेला भी प्रभावित हुआ, लेकिन इस बार ज्यादा लोगों के आने की संभावना को देखते मेला क्षेत्र में बिजली, पेयजल, सफाई, रात्रि विश्राम आदि व्यवस्थाएं बड़े स्तर पर की जा रही हैं।
हालांकि, मुख्य स्नान आठ नवंबर को है लेकिन कार्तिक मेला चार नवंबर से होगा। इसलिए जिला पंचायत के कर्मचारियों ने जरूरी सामान के साथ वहां पहुंचकर तंबुओं की बस्ती बसा ली है। मेला 12 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। जिला पंचायत ने 12 लाख रुपये का बजट जारी किया है। यहां लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, बरेली, फर्रुखाबाद, एटा, इटावा, मैनपुरी, कासगंज आदि जिलों के हजारों श्रद्धालु आते हैं।
मेला परिसर में मिलेंगी ये सुविधाएं
ढाई घाट मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मेला क्षेत्र में सात-आठ किमी सड़कें बनाई जानी हैं। इसी क्रम में 100 इंडिया मार्क हैंडपंप, 20 सार्वजनिक शौचालय, दस मोबाइल शौचालय, रैनबसेरा, खोया-पाया शिविर और डीएम, एसपी, सीडीओ, मेला मजिस्ट्रेट (एसडीएम), सीओ आदि अधिकारियों के ठहराव को आवास और कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को घाटों पर बेरिकेडिंग की जाएगी। घाटों पर 24 घंटे मुस्तैद रहने के लिए 15 गोताखोर, अग्नि सुरक्षा के लिए फायरब्रिगेड और मेला कोतवाली कार्यालय भी बनाए जाएंगे। मेला प्रभारी नामित किए गए जिला पंचायत के वरिष्ठ लिपिक अनिल कुमार द्विवेदी के अनुसार सफाई व्यवस्था के लिए डीपीआरओ से 150 सफाई कर्मचारी मांगे गए हैं।
नखासा के बजाय तहबाजारी से होगी आय
जिला पंचायत को मेले पर होने वाले व्यय बजट की पूर्ति तहबाजारी और वहां लगने वाले नखासा (पशु मेेला) से हो जाती है, लेकिन इस बार गोवंश में लंपी वायरस के प्रकोप को देखते नखासा का आयोजन रद्द कर दिया गया है। फिर भी तहबाजारी से अच्छी आय होने की उम्मीद है। मेला प्रभारी ने बताया कि मेले में गांधी चौक से गंगातट तक तहबाजारी की दरें 600 रुपये प्रति मीटर, गांधी चौक से मेला प्रवेश द्वार तक 500 रुपये प्रति मीटर, जमीन पर फड़ लगाकर दुकानें लगाने वाले दुकानदारों से 300 रुपये प्रति मीटर और फेरी लगाकर सामान बेचने वालों से पूरे मेला क्षेत्र के 100 रुपये लिए जाएंगे।
दो वर्ष कोविड लॉकडाउन की वजह से बंद रहे ढाई घाट कार्तिक मेले में इस वर्ष अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मेला आरंभ होने तक कोलाघाट पैंटून पुल चालू नहीं हो पाने की दशा में तमाम श्रद्धालुओं को ढाई घाट पहुंचने में कठिनाई होगी, इससे मेले की आय भी प्रभावित होने की आशंका है। -अनिल कुमार द्विवेदी, ढाई घाट मेला प्रभारी, जिला पंचायत