शाहजहांपुर। बैंक यूनियनों की हड़ताल के चलते शनिवार को भी लोग नकदी संकट से जूझते रहे। महीने का पहला दिन होने के कारण तमाम संस्थानों से कर्मचारियों का वेतन जारी कर दिया गया लेकिन हड़ताल के चलते बैंक से वेतन निकासी नहीं हुई और लोगों की जेब खाली ही रहीं। बैंकों में लेनदेन बंद होने से ट्रांसपोर्टर और बिल्डरों को सबसे ज्यादा दिक्कतें हुईं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के तीमारदार दूसरे दिन भी रुपयों के लिए भटकते रहे।
शहर में ज्यादातर एटीएम हड़ताल के कारण शनिवार को बंद रहे। एसबीआई की टाउन हॉल शाखा स्थित एटीएम से कैश निकालने पहुंचे हथौड़ा गांव के अर्जुन सिंह ने बताया कि शहर के तमाम एटीएम की खाक छानने के बाद भी उन्हें रकम नहीं मिली। वह खाद लेने के लिए शहर आए थे, लेकिन रुपये की व्यवस्था नहीं हो पाई। अब उधार खाद खरीदनी पड़ेगी। सदर बाजार के कुशल कश्यप कहते हैं कि बैंक बंद होने से समस्या बढ़ी है। जरूरी काम के लिए रकम निकालनी थी, लेकिन एटीएम खाली पड़े हैं। बैंकों के ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। रोडवेज रेलवे क्रॉसिंग रोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम पर मिले पवन कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच एटीएम पर जाकर रकम निकालने का प्रयास किया, लेकिन एक में भी कैश नहीं था। लीड बैंक मैनेजर सीएच जोशी ने बताया कि हड़ताल के कारण लोगों को थोड़ी दिक्कत हुई होगी, लेकिन अब डिजिटल लेनदेन के दौर में कैश की आवश्यकता न के बराबर ही पड़ती है। फिर भी एटीएम में पर्याप्त रकम रखने के निर्देश हैं। लोगों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
बैकों की हड़ताल से बाजार में पसरा सन्नाटा
बाजार पर भी हड़ताल का पूरा असर दिखाई दिया। कैश न होने की वजह से कम लोग ही खरीदारी को निकले। इससे सदर बाजार, गोविंद गंज, चौक, जलालनगर मंडी में अन्य दिनों की अपेक्षा रौनक फीकी रही। कपड़े, ज्वेलर्स जैसी दुकानों से ग्राहक नदारद रहे। रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले ही दुकानों पर पहुंचे।
दूसरे दिन भी बंद रहे बैंक, कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
शाहजहांपुर। वेतनमान में संशोधन समेत अन्य मांगों को लेकर बैंक कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। शनिवार को भी कर्मचारियों ने इलाहाबाद बैंक की गोविंदगंज शाखा में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और बाइक रैली निकाली।
बैंक यूनियन के नेता अतुल मेहरोत्रा ने कहा कि सरकार बैंक कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्या का निस्तारण नहीं करा रही। उसका प्रयास है कि बैंक कर्मचारी अपनी मांगों को वापस ले लें, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। सरकार को बैंक कर्मचारियों की मांगें माननी ही होंगी। ऐसा न होने पर अनिश्चित कालीन हड़ताल की जाएगी। संवाद