पुवायां। एक तरफ अधिकारी टीम बनाने और जांच रिपाेर्ट मंगाने का दावा कर रहे है। दूसरी तरफ रविवार को भी बंडा और निगोही क्षेत्र में साठा धान की रोपाई जारी रही।
भूगर्भ जलस्तर गिरने पर डीएम ने वर्ष 2019-20 में साठा धान की रोपाई पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध अब भी जारी है, लेकिन कुछ संपन्न किसान बंडा के गांव गहलुइया, बरीबरा, भांवी, महोलिया, नवदिया बंकी, अखत्यारपुर, मकसूदापुर, अजोधापुर, गुनाह खमरिया, सुनासर, कुंवरापुर, इंदलपुर, उदरा टिकरी और निगाेही क्षेत्र में साठा धान की रोपाई में मशगूल हैं।
खुटार के छोटेलाल, रामखिलावन, बंडा के रामचंद्र, अलीशेर आदि का कहना है कि साठा धान पर सख्ती से रेाक लगाई जाए। साठा की रोपाई बंद होने के बाद से भू-गर्भ जलस्तर बढ़ा तो उनकी ठप हो चुकी बोरिंग फिर से पानी देने लगी है। साठा की राेपाई होने लगी तो बोरिंग फिर ठप हो सकती है। संपन्न किसान सब-मर्सिबल की अत्यधिक गहराई की बोरिंग करा लेते हैं, जो उनके लिए संभव नहीं है।
पौध डाली पर लेखपालों ने नहीं दी अधिकारियों को सूचना
वर्ष 2019-20 में साठा धान की रोपाई पर प्रतिबंध के बाद कुछ किसानों ने साठा की पौध तैयार करने का प्रयास किया था, लेकिन लेखपालों की रिपोर्ट पर अधिकारियाें ने सख्ती दिखाते हुए पौध को जुतवा दिया था। इस बार बंडा में कई किसानों ने साठा की पौध तैयार की, लेकिन लेखपालों ने इसकी रिपोर्ट एसडीएम सहित किसी अधिकारी को नहीं दी।
इसी लापरवाही की वजह से ही साठा धान की रोपाई धड़ल्ले से चल रही है। जिला कृषि अधिकारी के आदेश के बाद भी अपर जिला कृषि अधिकारी, तकनीकी सहायक, एडीओ कृषि आदि भी साठा धान की रोपाई नहीं रोक पा रहे हैं।
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साठा धान के संबंध में एसडीएम का पत्र मिला था। राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें सर्वे कर रहीं हैं। किसानों को साठा धान न लगाने के लिए समझाया भी जा रहा है, नहीं मानने पर कार्रवाई की जाएगी।
-सतीशचंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी