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1992 के सत्याग्रह में अधिवक्ता राजाराम का टूट गया हाथ

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शाहजहांपुर। अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए 1992 में चले आंदोलन में शहर के हजारों लोगों ने सत्याग्रह में शामिल होकर सरकार को चेताने का काम किया। इस दौरान सत्याग्रहियों पर लाठी चार्ज भी हुआ, जिसमें अधिवक्ता राजाराम मिश्रा समेत कई लोगों के गंभीर चोट आई। बाद में एक सत्याग्रही की मौत भी हो गई थी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता राजाराम मिश्र उन दिनों की याद करते हुए बताते हैं कि अयोध्या आंदोलन जब पूरे चरम पर था, तब सत्याग्रह अभियान भी चलाया गया था, जिसमें शहरवासियों ने भी बढ़चढ़ कर आंदोलन को सफल बनाने और सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए दबाव बनाने का काम किया था। शाहजहांपुर से तकरीबन पांच हजार लोगों को बरेली की अस्थाई जेलों में रखा गया। जत्थों के रूप में प्रतिदिन गिरफ्तारी देने के लिए हजारों लोगों ने अपना घर छोड़ दिया, जिन्हें पुलिस ने बसों के माध्यम से बरेली की अस्थाई जेलों में रखा।
राजाराम मिश्र बताते हैं कि उन्हें भी बरेली में एक महाविद्यालय में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा गया। इसी बीच सत्याग्रहियों को पता चला कि अयोध्या में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने गोली चलवा दी है, इससे आक्रोशित होकर सभी ने पुलिस पर पत्थरबाजी और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने अस्थाई जेल में ही कमरों की लाइट काटकर अंधेरा करके सत्याग्रहियों पर लाठी चार्ज कर दिया, जिसमें उनका दाहिना हाथ टूट गया। चूंकि वहां दो इंस्पेक्टर जो शाहजहांपुर रह चुके थे, उन्हें जब चोट लगने की जानकारी हुई, तो उन्होंने डॉक्टर बुलाकर मरहम पट्टी भी कराई।
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वह बताते हैं कि लाठीचार्ज में तमाम लोगों के चोट लगी थी, जिसमें एक साथी परशुराम अवस्थी के पैर में गंभीर चोट लगी, जो काफी समय तक ठीक नहीं हुई और बाद में उनकी मौत भी हो गई। इस आंदोलन में राम रतन, विनोद अग्रवाल समेत हजारों लोग शामिल हुए थे। लाठी चार्ज के बाद सभी ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, बाद में डीआईजी ने आकर सभी को समझाकर भूख हड़ताल खत्म कराई।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजाराम मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में जो फैसला दिया है, वह जितना संतुलित है, उतना ही ऐतिहासिक भी है, इसे स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। इस फैसले से देश के भविष्य का नवनिर्माण होगा।
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