शाहजहांपुर। हाईकोर्ट ने आसाराम को दोषी मानते हुए उसके सहयोगियों को बरी कर दिया। इससे पीड़िता के पिता काफी दुखी हैं। वह न्यायालय का आदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, फिर सुप्रीमकोर्ट का रुख करेंगे। उनका कहना है कि आसाराम के सहयोगियों के जेल से बाहर होने पर उन्हें खतरे की आशंका है।
वर्ष 2013 में शाहजहांपुर की नाबालिग पीड़िता ने आसाराम के खिलाफ दिल्ली के थाने में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके बाद कई गवाहों की हत्या की गई, लेकिन बिटिया और उसके पिता का हौसला डिगा नहीं। हाईकोर्ट ने आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसमें वह कई बार पैरोल पर बाहर आया।
इसी कड़ी में आसाराम की सजा को बरकरार रखते हुए सहयोगी शिल्पी और शरद को बरी कर दिया गया। उनके बरी होने पर पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
पीड़िता के पिता ने बताया कि आसाराम के साथ उसके दो सहयोगी भी कसूरवार हैं। इन दोनों पर भी कार्रवाई कराएंगे। आसाराम ने साक्ष्यों में हेरफेर किया है। बोले कि-उनकी वकीलों से वार्ता हो गई है। न्यायालय के आदेश की प्रति मिलने का इंतजार है। उसके बाद सुप्रीमकोर्ट जाकर लड़ाई लड़ी जाएगी।