शाहजहांपुर। गर्भावस्था के सातवें और आठवें महीने में बार-बार पेशाब जाना व पेडू में दर्द काफी खतरनाक साबित हो सकता है। ये यूरिन (मूत्र) संक्रमण के लक्षण हैं। संक्रमण के कारण जच्चा और बच्चा को नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में संक्रमण से ग्रसित महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। डॉक्टर द्वारा उनकी जांच कराने के बाद दवाएं दी जाती हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की सर्जन डॉ. शिल्पी सिंह ने बताया कि गर्भधारण करने के बाद महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी सावधानी बरतना चाहिए। हर तीन महीने में जांच के साथ डॉक्टर का मार्गदर्शन भी जरूरी होता है। ग्रामीण इलाके की महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत नहीं हैं। प्रसव का समय नजदीक आने से एक या दो महीने पहले ही महिलाएं पेडू या नाभि से थोड़ा नीचे हिस्से में (पेल्विस) के दर्द से जूझने लगती हैं। उन्हें बार-बार पेशाब आने लगता है। महिला रोग विशेषज्ञ के मुताबिक, बार-बार पेशाब आना और पेड़ू में दर्द यूरिन संक्रमण का लक्षण है। पेशाब के संक्रमण के कारण कई नुकसान हैं। इससे प्रसव जल्दी होने की आशंका रहती है। मां से गर्भ में पल रहे बच्चे में संक्रमण फैल सकता है। जल्द ही संक्रमण का उपचार न करने पर किडनी और उसक बाद रक्त में संक्रमण होने की संभावना रहती है। इस समस्या से जूझ रहीं 20 से 30 फीसदी गर्भवती महिलाएं हर दिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहुंच रही हैं। उन्हें डॉक्टर द्वारा उपचार के साथ ही सफाई पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया जाता है।
ये बरतें गर्भवती महिलाएं
यूरिन संक्रमण से बचने के लिए खूब पानी पिएं।
गुप्तांग की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
पीरियड के समय भी सफाई का ख्याल रखें।
हाई बीपी भी गर्भवती के लिए खतरनाक
राजकीय मेडिकल कॉलेज में महिला रोग से ग्रसित करीब 300 मरीज हर दिन पहुंच रहे हैं। इसमें करीब 100 से अधिक गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। कई गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लडप्रेशर की दिक्कत होती है। ये उनके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें जच्चा और बच्चा दोनों को नुकसान होने की संभावना रहती है।
ओपीडी में सबसे ज्यादा यूरिन संक्रमण से पीड़ित महिलाएं पहुंच रही हैं। पेड़ू में दर्द भी संक्रमण की वजह है। महिलाओं को इसके लिए सतर्कता बरतना चाहिए। गर्भवती को दवा के साथ सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा। - डॉ. शिल्पी सिंह, महिला रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज