बाबा विश्वनाथ मंदिर में चल रहे आध्यात्मिक प्रवचन का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन परम संत कृपालु जी महाराज की प्रचारिका भुवनेश्वरी देवी ने कहा कि भगवान की भक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पहले मन लगाना पड़ता है और बाद में मन स्वत: ही लगने लगता है। इसके लिए मन को वश में करना महत्वपूर्ण है।
साध्वी ने कहा कि किसी भी काम को करने की प्रेरणा सबसे पहले मन ही देता है। ईश्वर के प्रति लगाव मन ही पैदा करता है। इसलिए मन को इस लायक बनाने का प्रयास करना चाहिए, जो ईश्वर के प्रति लगाव पैदा करे। महाभारत युद्ध से पहले मोह में फंसे अर्जुन को समझाते हुए भगवान कृष्ण ने कहा था कि तू अपने धर्म का पालन कर मन के कारण ही तू अपनों के मोह में फंस रहा है, जबकि तेरा कर्तव्य तो युद्ध करना ही है। ऐसा मन तू मुझे दे दे यानी अपना मन मुझमें लगा ले, फिर सब कुछ तेरा हो जाएगा।
समापन पर प्रसाद वितरण किया गया। रविवार को शाम सात बजे साध्वी भुवनेश्वरी देवी की कथा कृष्णानगर मंदिर में होगी। व्यवस्था में श्रीप्रकाश कलवानी, राज कुमार खंडेलवाल, अनिल तनेजा, सतनाम, सुशील नारंग, ओम प्रकाश भगत, मोहन लाल आदि का योगदान रहा।