जिले में 14200 बच्चे अतिकुपोषित और 59183 कुपोषित हैं। बीते साल दिसंबर में 363 नए अतिकुपोषित तथा 839 कुपोषित बच्चे चिह्नित हुए हैं। जनवरी माह में कुल 1607 बच्चे कुपोषण से निकलकर सामान्य श्रेणी में आए हैं।
प्रभारी सीडीओ पीपी त्रिपाठी की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई जिला स्तरीय पोषण समिति की बैठक में यह तथ्य सामने आए। प्रभारी सीडीओ ने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में राज्य पोषण मिशन अहम है। इसके अंतर्गत पांच वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार का कुपोषण न आने देने पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे अतिकुपोषित हों और उनमें शारीरिक विकास न हो रहा हो तो उन्हें जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र पर जरूर भिजवाएं। इसके लिए एंबुलेंस की 102 व 108 की सेवायें ली जा सकती हैं।
समस्त सीडीपीओ को निर्देश दिए कि लगातार इस कार्यक्रम की समीक्षा करें। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन लिया जाए। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को पोषाहार और आयरन की गोली दी जाए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 27 जनवरी से तीन फरवरी तक मातृत्व हुए शत प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जाएगा। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्र, जिला प्रतिरक्षीकरण अधिकारी डॉ. लक्ष्मण, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केशव स्वामी आदि मौजूद रहे।