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देवी का रूप हैं कन्याएं, इन्हें कोख में मत मारो

Thu, 20 Aug 2015 11:36 PM IST
शाहजहांपुर
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काशी के विद्वान एवं शिव कथा मर्मज्ञ प्रशांत प्रभु महाराज ने शिव महापुराण कथा मंच से कन्या भ्रूण हत्या को महापाप बताते हुए श्रोताओं का आह्वान किया कि वह इस अपराध से बचें। कन्याएं देवी का रूप होती हैं, इनकी हत्या करने का मतलब है सर्वनाश को आमंत्रण देना।
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श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में एक प्रसंग के अंतर्गत कथा व्यास ने देवी महिमा का महात्म्य सुनाते हुए कन्याओं को देवी का रूप बताया और कहा कि मानव जीवन का मूलाधार कन्याएं ही हैं। ये जननी हैं, आदि शक्ति हैं। इनके जीवन की रक्षा करना संपूर्ण मानवजाति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को स्त्रियों के प्रति दो प्रमुख कारणों से ऋणी मानना पड़ेगा। प्रथम मनुष्य का जन्म देने और द्वितीय इस जीवन को जीने लायक बनाने का काम भी माताएं-बहनें ही करती हैं। स्त्री और पुरुष नदी के दो किनारों की तरह माने गए हैं, तभी तो गोस्वामी जी ने लिखा है कि Òजिय बिनु देह नदी बिनु वारी, तैसेइ नाथ पुरुष बिनु नारीÓ।
प्रशांत प्रभु ने कहा कि भगवान भोलेनाथ माता पार्वतीे के बिना अधूरे हैं और यह बात हर प्रसंग में सामने आती है। इसलिए कन्या भू्रण हत्या का पाप किसी को नहीं करना चाहिए। उन्होंने युवाओं का आह्वान भी किया कि वह इन घिनौने कृत्य का पुरजोर विरोध करें। अन्यथा एक दिन पूरी सृष्टि ही नष्ट हो जाएगी। नारी शक्ति का सम्मान तमाम पापों से बचाता है। कथा व्यास ने कहा कि हिंदू धर्म में भगवान शिव का स्थान सर्वोच्च है। धर्मशास्त्रों और पुराणों में इसकी पुष्टि होती है। भगवान शिव सर्वशक्तिमान हैं और उन्होंने अमृत का त्याग कर विष का पान किया। वह वैभव से दूर हैं और सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तु के समर्पण से प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें भोले कहा जाता है। वह बहुत जल्दी भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। आयोजन में हरिशरण वाजपेयी, नीरज वाजपेयी, नरेंद्र सक्सेना, अशोक गुप्ता, रजत सक्सेना, विश्व मोहन वाजपेयी, शैफाली, सीमा, पिंकी आदि का योगदान रहा।
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