प्रदेश की योगी सरकार की फसली ऋण मोचन योजना के तहत जिले में लघु सीमांत श्रेणी के 1.18 लाख किसानों को लाभान्वित किया जाना है, लेकिन पहले चरण में केवल 20274 किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र जारी होंगे। ये वे किसान हैं, जिन्होंने अपने बैंक खातों से आधार नंबर लिंक कराने में तत्परता बरती। योजना लागू करने को प्रशासन वीआईपी कार्यक्रम की तैयारी में जुट गया है।
बता दें कि जिले में कार्यरत 31 बैंकों की करीब 300 शाखाओं से लगभग चार लाख किसानों ने 45 अरब रुपये का कृषि ऋण ले रखा है। इनमें ढाई से पांच एकड़ जोत वाले 3.52 लाख लघु-सीमांत श्रेणी के किसानों पर लगभग 25 अरब रुपये की ऋण देनदारी है। यही नहीं, निर्धारित अवधि में बकाया अदा नहीं करने वाले लगभग 50 हजार किसानों के खाते एनपीए श्रेणी में लाए जा चुके, जबकि ऐसे किसानों पर 380 करोड़ रुपये बकाया है। बैंक अधिकारियों ने सपा शासनकाल में 8500 से अधिक ऐसे कृषक खातेदार चिन्हित किए, जो ऋण अदायगी में सक्षम होने के बावजूद लोन नहीं चुका रहे। ऐसे किसानों से राजस्व की वसूली के पैटर्न पर फसली ऋण वसूलने को रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने की तैयारी की गई, लेकिन सरकार ने कर्जमाफी का तोहफा देकर किसानों से आरसी के जरिए वसूली की बला फिलहाल टाल दी है। बैंक अधिकारियों केे अनुसार जिले में लघु सीमांत श्रेणी के करीब 3.50 लाख किसान हैं, लेकिन सरकार की कर्जमाफी का लाभ फिलहाल उन्हीं किसानों को देय होगा, जिन्होंने गत वर्ष 31 मार्च से पहले फसली ऋण लिए हैं। ऐसे लगभग 1.18 लाख किसान चिन्हित किए गए हैं। खास यह है कि कर्ज माफी में मूलधन और ब्याज को एक ही पैमाने पर रखा गया है। ऐसी स्थिति में उन किसानों को ऋण पर देय ब्याज से भी मुक्ति मिल जाएगी, जिन्होंने एक लाख रुपये से कम कर्ज लिया है।