जलालाबाद के गांव तिकोला स्थित मां काली का मंदिर। संवाद
जलालाबाद। तिकोला और ढकियाइन गांव में देवी माता के प्राचीन मंदिरों पर 15 दिवसीय वार्षिक मेले आज बुधवार से आरंभ हो जाएंगे। इसको लेकर मंदिर प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेला स्थल पर तरह-तरह के सामान की दुकानें लगना शुरू हो गईं हैं।
तिकोला में बहगुल नदी के किनारे मां काली का मंदिर महाभारतकालीन बताया जाता है। बताते हैं कि प्राचीन काल में यहां घना जंगल था। अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने काफी समय यहीं गुजारा था। इस दौरान अर्जुन ने मां काली की मूर्ति बनाकर उनकी घोर तपस्या की थी। मान्यता है कि मां काली ने उन्हें दर्शन देकर दिव्यास्त्र भी प्रदान किए थे।
जाते समय पांडवों ने माता की उस मूर्ति को मिट्टी का मंदिर बनाकर उसमें स्थापित कर दिया था। मौजूदा समय में वहां विशाल मंदिर बना है और उसके गर्भगृह में माता की मूर्ति के निशान जैसे बने हैं। मंदिर की देखरेख करने वाले नरेश ने बताया कि कल से शुरू होकर मेला आषाढ़ी (15 जुलाई) तक चलेगा। इस दौरान सप्ताह के सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को देवी जी की विशेष पूजा होगी।
वहीं गांव ढकियाइन के बारे में मान्यता है कि वहां ऋषि जमदग्नि का आश्रम व गुरुकुल था। गुरुकुल में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। यह भी मान्यता है कि इसी आश्रम में भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था। यहां से करीब दो किमी दूर कटका, कटकिया के नाम से बसे गांव की जगह पर ही भगवान परशुराम और सहस्राबाहु का महासंग्राम हुआ था।
काफी विस्तृत क्षेत्र वाले इस आश्रम में माता रेणुका और जमदग्नि की मूर्ति वाले प्राचीन मंदिर हैं। यहां भी मंदिर नये रूप ले चुके हैं लेकिन उनके अंदर स्थापित मूर्तियों के अंश ही मौजूद हैं।
जलालाबाद के गांव तिकोला स्थित मां काली का मंदिर। संवाद