शाहजहांपुर। जिले में कई जगह सूखे पड़े अमृत सरोवरों में सरकार के करोड़ों रुपये डूब गए। कागजों में इनका निर्माण हो गया है, लेकिन हकीकत इसके परे है। कहीं बजट की कमी है तो कुछ जगह पानी भरने की व्यवस्था नहीं है। कई जगह तो इस क्षेत्र में उपले पाथे जा रहे हैं। वहीं, भीषण गर्मी में पशु-पक्षी प्यास से परेशान हैं।
मनरेगा की ओर से जल संचयन के लिए वर्ष 2020 से अब तक 275 अमृत सरोवरों का निर्माण कराने का दावा प्रशासन ने किया है। इसमें साढ़े पांच करोड़ से अधिक का बजट खर्च किया गया। इसका उद्देश्य जलसंरक्षण, पर्यटन व कृषि सिंचाई का है। इन्हें बनाने के लिए बजट तो पहुंचा, लेकिन वह कागजों में ही खप गया। इसकी सच्चाई पड़ताल में सामने आई है।
जैतीपुर क्षेत्र के गांव आलमपुर में अमृत सरोवर को बनाने में करीब 10.30 लाख रुपये खर्च किए गए। वर्तमान में तालाब की स्थिति ऐसी है कि पटरी पर ग्रामीण उपले थोपे रहे हैं। तालाब बच्चों के लिए खेल का मैदान बन गया है। पानी के नाम पर इसमें एक बूंद नहीं हैं। क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिनौरा बिनौरिया के मजरा कीरतपुर में बना अमृत सरोवर बदहाल स्थिति में है। इसमें पानी न होने से सतह में दरारें पड़ गई हैं। आसपास झाड़ियां उग आई हैं। निर्माण में सुंदरीकरण के नाम पर 11.34 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया। तालाब के पास बैठने के लिए बेंच नहीं बनाईं गईं। कांटे वाली घास उग आई है। बिनौरा बिनौरिया की प्रधान फूलमती ने बताया कि अमृत सरोवर में सफाई कराकर पानी भरने का काम कराया जाएगा।
आलमपुर की ग्राम प्रधान कल्पना गुप्ता ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष का करीब दो लाख रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। पानी भरने का कार्य शीघ्र कराया जाएगा।
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सरोवर से नहीं मिल रहा अमृत
देवकली। अनदेखी के चलते यहां भी तालाब सूखा पड़ा है। क्षेत्र में उपले पाथे जा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने तालाब पर अवैध रूप से कब्जा भी कर रखा है। गांव के प्राचीन देवी मंदिर के सामने 2022-23 में लगभग छह लाख की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया। यहां बैठने के लिए जगह नहीं है। ग्रामीणों ने मंदिर और तालाब की जगह पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जिसकी उन्होंने थाना दिवस एवं तहसील दिवस में शिकायत भी की थी, पर कोई समाधान नहीं हुआ। ग्राम प्रधान अरुण सिंह ने बताया कि अमृत सरोवर का खोदाई का एस्टीमेट लगभग छह लाख बना था। मजदूरों से कराई गई खोदाई का भुगतान अभी नहीं हो पाया है। संवाद
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बजट नहीं मिलने से निर्माण अटका
कुर्रियाकलां। क्षेत्र के गांव नगला जाजू में पिछले दो वर्ष में सात लाख की लागत से तालाब की खोदाई का काम 40 प्रतिशत ही हो पाया है। बजट के अभाव में अमृत सरोवर की खोदाई पूरी नहीं हो पाई। गांव में आसपास के अलावा कोई तालाब नहीं है। ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने बताया कि मनरेगा के अधिकारियों से बजट के लिए संपर्क किया गया है, लेकिन अभी तक मिल नहीं पाया है। संवाद
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अमृत सरोवरों की सफाई के निर्देश खंड विकास अधिकारियों को दिए गए हैं। अगर कहीं से नहर गुजर रही है तो पानी भी भरवाने के लिए कहा गया है। बारिश होने पर अमृत सरोवरों में जल संचयन किया जाएगा।
- बाल गोविंद मिश्रा, डीसी मनरेगा
जैतीपुर क्षेत्र के गांव आलमपुर में सूखे पड़े अमृत सरोवर में थोपे जा रहे उपले। संवाद