आसमान के उत्तरी छोर पर रात के वक्त आतिशबाजी जैसा नजारा देने वाला उल्कापात का दौर शुरू हो गया है। जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक एवं वैज्ञानिक संस्था रिसर्च के निदेशक डॉ. इरफान ह्यूमन के अनुसार आसमान में रात के वक्त समूह में दिख रहे टूटते तारे वास्तव में सुइफ्ट टटल नामक धूमकेतु का मलबा हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे अरबों ठोस कणों वाले धूमकेतु के मलबे के बीच से आजकल पृथ्वी गुजर रही है। 17 जुलाई से 24 अगस्त तक धूमकेतु के कणों की वायुमंडल में अधिकता होने पर खगोलीय आतिशबाजी जैसा नजारा आसानी से देखा जा सकेगा। डॉ. ह्यूमन के अनुसार बृहस्पतिवार को आधी रात के दौरान वायुमंडल में इन कणों की इतनी अधिकता होगी कि 60 उल्का प्रति घंटे देखी जा सकेंगी।