शाहजहांपुर। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शनिवार को एसएस कॉलेज की एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) की छात्राओं के बीच ‘सशक्त नारी’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। गांव नवादा इंदेपुर में लगे शिविर में बतौर मुख्य वक्ता रानी लक्ष्मीबाई विंग की संस्थापक डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि युवाओं को महिला अस्मिता को चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ खड़े होने की जरूरत है। छात्राएं शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत बनकर हर क्षेत्र में सफलता पा सकती हैं।
डा. नमिता सिंह ने कहा कि मिशन शक्ति अभियान के प्रचार-प्रसार से महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सचेत हुई हैं। इसके बावजूद उन्हें घर से बाहर कदम निकालने पर अक्सर युवकों की छींटाकशी, छेड़खानी, एसिड अटैक जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। युवाओं की इस प्रवृत्ति को देखते हुए अब युवतियों से कहीं अधिक युवकों को यह समझाने की आवश्यकता है कि जिस यदि कोई उनकी अस्मिता को चोट पहुंचाने की कोशिश करे तो उसे भी रोकें।
विशिष्ट अतिथि रानी लक्ष्मी बाई विंग की अध्यक्ष विम्मी सैनी ने कहा कि महिलाओं को शक्ति स्वरूपा कहा गया है और इसी के अनुरूप महिलाएं पूरे आत्मविश्वास के साथ घरों से बाहर कदम निकलते वक्त यह प्रण कर लें कि किसी भी स्तर पर उत्पीड़न का डटकर मुकाबला करना है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने लघु नाटक, भाषण, गीत और कविताओं के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार आदि सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार कर उन्हें दूर करने को सुझाव दिए। इस अवसर पर एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना, एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रमोद यादव, मुस्कान सिंह, दामिनी शुक्ला, यति दीक्षित, यशी पूर्ति खन्ना, आयुष कुमार सिंह, नरवीर, चंद्रहास अग्निहोत्री, वैभव गुप्ता, राजमोहन पाठक आदि रहे।
पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को अभी तक अबला कहा जाता रहा है। अब नारी सशक्तिकरण की दिशा में चलाए गए अभियानों के कारण महिलाएं हर क्षेत्र मेें अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराकर स्वयं को सक्षम और सबला प्रमाणित कर रही हैं। - रीतू वर्मा
यह हमारे समाज की विडंबना है कि लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार देने की चेष्टा की जाती है। बालिकाओं के प्रति भेदभाव की भावना किसी को नहीं रखनी चाहिए। इस सामाजिक कुरीति को दूर करने में अपराजिता कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहा है। - दामिनी शुक्ला
कन्या भ्रूण हत्या का मूल कारण दहेज प्रथा है। यदि समाज से दहेज की कुरीति समाप्त हो जाए तो जन्म लेने से पहले लड़कियों को मारने की प्रवृत्ति पर काफी हद तक अंकुश लग जाएगा। महिलाओं को ऐसी सुरक्षा मिले कि उन्हें कहीं भी आते-जाते वक्त भय नहीं लगे। - कीर्ति त्रिपाठी
मैं परिवार और अपने स्वयं के विश्वास के भरोसे रोज कॉलेज जाती हूं, लेकिन हर समय अपने आसपास के अपरिचितों को लेकर सजगता बरतनी पड़ती है। लोगों में एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक विचार पैदा हों तो भय की भावना मिट जाएगी। - दिव्यांशी गौतम
हम अपनी सुरक्षा को हमेशा तत्पर रहते हैं। परिवार के बीच रहने पर भी सुरक्षा का बोध होता है, लेकिन महिलाओं के साथ हो रहीं आपराधिक घटनाओं को देखते घर से बाहर कदम निकालते ही मन में भय पैदा होता है। महिलाओं की सुरक्षा के विशेष प्रयास होने चाहिए। - सौरभी सिंह
नारी समाज को अपनी सुरक्षा के लिए आत्मविश्वास को मजबूत करना होगा। स्वयं में इतना आत्मबल होना चाहिए कि राह चलते किसी सिरफिरे की वजह से अप्रिय स्थिति का सामना होने पर उसे सबक सिखा सकें। ऐसा करने पर समाज भी मदद को आगे आता है। - पूर्ति खन्ना
अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करती विम्मी सैनी । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR
अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में उपस्थित छात्र -छात्राएं। । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR