अमन सक्सेना व उनकी पत्नी अंजलि सक्सेना। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी अक्षमता रास्ते की बाधा नहीं बन सकती। शहर के भारद्वाज कॉलोनी में रहने वाले देवेंद्र सक्सेना के बेटे अमन इसके उदाहरण हैं। बचपन से ही सुनने-बोलने में अक्षम अमन मूक-बधिरों की समस्याओं को हर स्तर पर उठाते रहते हैं। उनकी पत्नी अंजलि भी मूकबधिर हैं लेकिन पति का पूरा साथ देतीं हैं।
30 साल पहले देवेंद्र सक्सेना के घर अमन का जन्म हुआ। एक साल की उम्र में दिमागी बुखार आने के कारण उनकी सुनने और बोलने की शक्ति चली गई। अमन ने लखनऊ में आठवीं तक और दिल्ली में बारहवीं तक की पढ़ाई की।
वर्तमान में अमन सक्सेना आईटीआई में कंप्यूटर ऑपरेटर हैं। उनकी जीवनसंगिनी अंजलि भी एमए और बाम्बे आर्ट से प्रशिक्षण प्राप्त हैं। अमन सक्सेना मूक-बधिरों के हक की आवाज लगातार उठाते रहते हैं। इसके लिए जिले से लेकर लखनऊ में मुख्यमंत्री तक से मिल चुके हैं।
मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता कार्यक्रम (स्वीप) में दिव्यांगजन मतदाता जागरूकता अभियान में मूक-बधिरों को वोट देने के लिए सांकेतिक भाषा के माध्यम से जागरूक करने के लिए अमन को प्रशासन सम्मानित भी कर चुका है। अमन अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संघ के महासचिव हैं। अमन मुख्यमंत्री व राज्यपाल से मिल चुके हैं। उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर के स्थान पर क्लर्क की नौकरी का आश्वासन मिला है। उनकी हिंदी, अंग्रेजी और गणित पर भी अच्छी पकड़ है।