शाहजहांपुर। रसायनमुक्त खेती के लिए प्रेरित करने व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि सखी किसानों को प्रेरित कर रही हैं। वे अपने कलस्टर में किसानों से संपर्क साधकर प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक कर रहीं हैं। महिलाओं के सक्रिय होने से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की संख्या में इजाफा हुआ है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से करीब पांच सौ कृषि सखी नियुक्त की गईं। ब्लॉक स्तर पर कलस्टर बनाकर चिह्नित किसानों की सूची दी गई। प्रत्येक कलस्टर में दो कृषि सखी को शामिल किया गया है। उन्हें कृषि विभाग की ओर से किसानों की सूची देकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य दिया गया है।
कृषि सखी अपने क्षेत्र में किसानों से संपर्क साधकर गो आधारित प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक कर रही हैं। कृषि सखी किसानों की पाठशाला लगाकर प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित करती हैं, साथ ही गाय के गोबर से जीव अमृत निगरानी में बनवाती हैं, जिससे फसल रसायनमुक्त हो सके। उप कृषि निदेशक पुरुषोत्तम मिश्रा ने बताया कि कृषि सखी को पांच हजार रुपये प्रति महीने मानदेय मिल जाता है।
इस वर्ष मई महीने में कार्य शुरू किया था। गो आधारित खेती के लिए किसानों को जागरूक करते हैं। प्रत्येक किसान को दो हजार रुपये दिए जाते हैं, जिससे ड्रम आदि खरीदे जाते हैं।
- उर्मिला देवी, कृषि सखी
किसानों की पाठशाला लगाकर जहरमुक्त खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं। गाय पालने व गोबर के जरिये प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक करते हैं। गो आधारित खेती के लिए लोग जागरूक हुए हैं।
- सीमा देवी, कृषि सखी
कृषि विभाग से किसानों की सूची मिलती है। उन्हीं किसानों से संपर्क साधकर उन्हें प्रशिक्षित करते हैं। उन्हें रसायनमुक्त खेती के लिए प्रेरित करते हैं। अब तक करीब सौ लोगों को जागरूक कर चुके हैं।
- अंजलि, कृषि सखी
अंजलि, कृषि सखी। स्रोत: स्वयं
अंजलि, कृषि सखी। स्रोत: स्वयं