फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahjahanpur News: बाढ़ से डरे, इस बार तीन गुना अधिक किसानों ने कराया फसल बीमा

विज्ञापन
हरेंद्र सिंह, ताहरपुर जैतीपुर।
विज्ञापन
शाहजहांपुर। खरीफ के सीजन में कृषक फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में पिछले साल की अपेक्षा तीन गुना से अधिक का इजाफा हुआ है। जुलाई में आई बाढ़ में फसलें नष्ट होने के बाद 14589 किसानों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है, ताकि आगे ऐसे हालात बने तो नुकसान की भरपाई हो सके।
विज्ञापन


जिले में पांच लाख से अधिक किसान हैं। पहले किसानों को फसल बीमा करवाना अनिवार्य था। वर्ष 2021 में सरकार ने फसल बीमा की अनिवार्यता खत्म कर दी। अब जो भी किसान फसल बीमा कराना चाहता है, वह ही संबंधित बैंक में अपनी खतौनी की काॅपी और एक प्रार्थनापत्र लिखकर देता है। तभी फसल का बीमा होता है।

बीमा का प्रीमियम किसान के खाते से काट लिया जाता है। बीमा कराने वाले किसानों को क्राॅप लोन भी आसानी से मिल जाता है। इसलिए जरूरतमंद किसान ही फसल का बीमा करा लेते हैं।
विज्ञापन


-

इसलिए बनाते हैं दूरी

-किसानों का कहना है कि फसल बीमा कराने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जब उनकी फसल का नुकसान हो जाता है तो मुआवजा लेने के लिए बीमा एजेंसी से लेकर बैंक के उन्हें चक्कर लगवाए जाते हैं। मुआवजा मिल भी जाए तो वह इतना कम होता है कि उससे उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिल पाता है।

-

खरीफ सीजन में बीमित फसलों का प्रति बीघा प्रीमियम

धान- 136.95 रुपये

मक्का- 57 रुपये

बाजरा- 57.53 रुपये

उर्द- 67.23 रुपये

तिल- 13.49 रुपये

-

खरीफ की फसल की पिछले चार वर्ष में बीमा की स्थिति

वर्ष किसानों की संख्या

2021 5321

2022 5313

2023 4509

2024 14589

-

विभाग ने भी किया प्रोत्साहित

कृषि विभाग ने किसानों को बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित किया। बीमा योजना का प्रचार प्रसार किया। इसका नतीजा निकला कि बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में इस वर्ष खरीफ की सीजन में तीन गुना से अधिक का इजाफा हुआ है। 27 अगस्त तक संबंधित बैंकों ने किसानों का बीमा किया। कई बार कृषि विभाग की ओर से बीमा कराने की तारीख बढ़ाई गई। इस वजह से किसानों की संख्या में वृद्धि हुई।



किसानों से बातचीत

फोटो- 30

- पहले ओलावृष्टि में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी। इसके बाद से फसल का बीमा कराना शुरू कर दिया है। इस वर्ष तीन एकड़ धान का बीमा कराया है। बीमा कराने पर मुआवजा मिलने में आसानी रहती है।

- हरेंद्र सिंह, ताहरपुर जैतीपुर

-

फोटो- 31

इस बार तीन एकड़ खेती में धान की फसल की है। पहले कई बार बारिश और ओलावृष्टि या बाढ़ से फसल बर्बाद हो जाती थीं। फसल बीमा होने से नुकसान की भरपाई हो जाती है।

- हिमांशु मिश्रा, कुर्रिया कलां।

-

जुलाई में आई बाढ़ में किसानों की फसल को अधिक नुकसान हुआ। इस बीच किसानों को फसल बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार भी किया गया। इसकी वजह से किसानों की संख्या में इजाफा हुआ है।
विज्ञापन


- धीरेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक

हरेंद्र सिंह, ताहरपुर जैतीपुर।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें