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Shahjahanpur News: एडीएम ने सीसीटीवी फुटेज तलब किए, कमेटी भी गठित

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शाहजहांपुर। पुवायां के कंपोजिट स्कूल भटपुरा चंदू की सहायक अध्यापिका चारू आहूजा की मौत के मामले में प्रशासन की जांच ने तेजी पकड़ ली है। एडीएम अरविंद कुमार ने कमला नर्सिंग होम व डॉ. ब्रजदीप नर्सिंग होम में सीसीटीवी फुटेज देखे, साथ ही घटना से दो दिन पूर्व की रिकॉर्डिंग मांगी है। मामले में सीएमओ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
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थाना सदर बाजार के मोहल्ला मोहनगंज में रहने वाले मयंक चड्ढा की पत्नी चारू आहूजा के गर्भवती होने पर डॉ. दीपा के नर्सिंग होम से उपचार चल रहा था। प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें ब्रजदीप नर्सिंग होम में लाया गया था। यहां ऑपरेशन होने के बाद चारू ने बच्चे को जन्म दिया था। अगले दिन यानी 21 अप्रैल को उसकी तबीयत बिगड़ गई। पति ने आरोप लगाया था कि हालत खराब हाेने पर दोबारा से ऑपरेशन किया। डॉ. पवन अग्रवाल, डॉ. पाठक व एक अन्य डॉक्टर को बुलाया। इसके बाद वेंटीलेटर पर रखने के लिए रेफर कर दिया।
एंबुलेंस से डॉ. पीके अग्रवाल के अस्पताल में भेजा। जहां उसकी मौत हो गई। शिक्षिका के पिता की तहरीर पर पुलिस ने आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पवन अग्रवाल, डॉ. दीपा, डॉ. पाठक समेत चार पर रिपोर्ट दर्ज की थी। वहीं डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने एडीएम एफआर अरविंद कुमार को जांच के आदेश दिए।
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एडीएम ने डॉ.दीपा और डॉ.पीके अग्रवाल के अस्पताल में सीसीटीवी फुटेज को देखा। डॉ.दीपा से घटना से तीन दिन पहले तक की फुटेज और मामले से संबंधित सारे अभिलेख मांगे गए हैं। एडीएम ने परिजन के बयान भी दर्ज कर लिए हैं। मामले में सीएमओ डॉ.विवेक मिश्रा की निगरानी में डॉ.पीपी श्रीवास्तव, डॉ.रितु रस्तोगी, डॉ.घनश्याम आदि की टीम गठित की है, जो चिकित्सीय अभिलेखों का परीक्षण करेंगे। एडीएम ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का परीक्षण कर मंगलवार तक जानकारी मांगी है।

विवेचना के नाम पर शांत बैठी पुलिस
आमजन से जुड़ा मामला होने पर तुरंत तेजी दिखाने वाली पुलिस के तेवर केस में ढीले पड़े हुए हैं। 15 दिन बीतने के बाद भी पुलिस मात्र विवेचना चलने की बात कह मामले को ठंडे बस्ते में डाले हुए है। ऐसे में परिजन भी पुलिस के बजाय प्रशासन के अधिकारियों से आस लगाए बैठे हैं।

दवा चोरी का मामला दबकर रह गया
पिछले वर्ष एक जून को राजकीय मेडिकल कॉलेज में पांच लाख रुपये के सर्जिकल सामान चोरी के प्रयास का राज अब तक नहीं खुल सका है। मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। फार्मासिस्टों पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी यह सामने नहीं आया कि उपकरण कहां ले जाए जा रहे थे। अथवा वह वाहन किसका था। 11 महीने बीतने के बाद भी मामला फाइलों में दबा है।

पीड़ित परिवार के बयान ले लिए गए हैं। अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज देखी गई। पूर्व के दो दिन की फुटेज भी मांगी गई। मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच कर डीएम को रिपोर्ट दी जाएगी। - अरविंद कुमार, एडीएम
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