किराये पर रखा पढ़ाने वाला
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय कभी-कभी खुलता है। प्रधान अध्यापिका आंचल महीने में एक-दो बार स्कूल आती हैं। खुद ही उपस्थिति चढ़ा लेती हैं। पढ़ाई के लिए कुछ रुपये देकर पास के गांव के लड़के को निजी तौर पर रख दिया है। वही पढ़ाता है। रसोइया भी गांव में रहती है। एमडीएम के खाने में भी मनमानी की जाती है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है।
ग्रामीणों ने एडीएम से स्कूल की व्यवस्था ठीक कराने की मांग की है। एडीएम ने बताया कि स्कूलों में अध्यापक का समय से उपस्थित न होना काफी खेदजनक है। स्कूल में पूर्वाह्न 11 बजे तक ताला लगा होना अक्षम्य है। मामले की रिपोर्ट डीएम को भेजी जा रही है। कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी।