शाहजहांपुर। पूर्व में कई बार हादसों के बावजूद हाईवे पर दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ई-रिक्शों पर प्रशासन प्रतिबंध नहीं लगा सका है। शहर से लेकर देहात क्षेत्र में बगैर रजिस्ट्रेशन के दौड़ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। डीएम ने कई बार बैठक में हाईवे पर ई-रिक्शा संचालन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए लेकिन धरातल पर कोई असर नजर नहीं आ रहा।
बदायूं में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की टक्कर से ई-कार्ट सवार छह महिलाओं की मौत हो गई। जिस तरह के हाईवे पर हालात हैं, उससे यहां भी ऐसे किसी हादसे की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। परिवहन विभाग के आंकड़ों में लगभग 20 हजार ट्रैक्टर पंजीकृत हैं, जबकि कृषि कार्य के लिए ट्रॉलियों की संख्या मात्र 15 से 20 ही है।
नियम के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली के व्यावसायिक उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इसके बावजूद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत, मिट्टी खनन, ईंट-गिट्टी की ढुलाई की जा रही है। हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में 30-40 लोगों को बैठाकर चला जा रहा है। एआरटीओ प्रवर्तन हरिओम के अनुसार, कृषि कार्य के बजाय कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली व्यावसायिक उपयोग करते हुए मिलने पर उसके ऊपर 30 से 50 हजार रुपये का जुर्माने का प्रावधान है।
हाईवे पर ई-रिक्शे प्रतिबंधित...फिर भी दौड़ रहे
डीएम ने हादसों को देखते हुए हाईवे पर ई-रिक्शों के संचालन पर प्रतिबंध लगा रखा है। प्रत्येक सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में प्रतिबंध के वाक्य को दोहराया जाता है। इसके बाद भी ई-रिक्शे आदेश को रौंद रहे हैं। शाहजहांपुर से निगोही, बरेली मोड़ से कांट, बरेली मोड़ से तिलहर तक ई-रिक्शों का संचालन देखा जा सकता है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में ई-रिक्शों पर सवारी बैठाने के साथ ही सरिया, भारी सामान, लकड़ी आदि ढोई जा रही है।
-20 हजार ई-रिक्शा जिले में हैं संचालित।
-4018 ई-रिक्शा वर्ष 2024 में एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत किए गए।
-3434 ई-रिक्शा वर्ष 2025 में परिवहन विभाग के आंकड़े में पंजीकृत हैं।
व्यावसायिक कार्य सहित यात्री ढोने में इस्तेमाल हो रहीं ट्राॅलियां
जलालाबाद। लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर मंगलवार को मैगलगंज के पास हुए हादसे से पुलिस-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। बरेली- फर्रुखाबाद हाईवे और लिपुलेख-भिंड हाईवे पर बिना रिफ्लेक्टर लगी ओवरलोड और यात्रियों से भरीं ट्रैक्टर-ट्राॅलियां बुधवार को भी निकलती रहीं। हाईवे पर चलने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत उन ट्रॉलियों से होती है, जो मिट्टी और रेत के अवैध खनन में लगी हैं।
तेज रफ्तार के साथ यह ट्राॅलियां पूरी रात चलती हैं। रेडियम रिफ्लेक्टर नहीं लगे होने से अक्सर हादसे का सबब बनती हैं। अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर को गंगा तट पर ले जाना हो या किसी पर्व के दिन होने वाले बच्चों के मुंडन, अन्नप्राशन जैसे मांगलिक कार्य के लिए धार्मिक स्थल पर जाना, ग्रामीण क्षेत्र से लोगों को लाने-ले जाने में ट्रैक्टर-ट्राॅलियों का जमकर प्रयोग देखा जा सकता है। संवाद
अक्सर होते हैं हादसे
15 अप्रैल 2023 को तिलहर के सुनौरा अजमतपुर गांव के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली गर्रा नदी के पुल के नीचे गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई थी और 27 लोग घायल हुए थे। वहीं, हाईवे पर करीब तीन माह पूर्व ट्रैक्टर-ट्राॅली की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई थी। रोजा में लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर गुर्री चौकी के पास करीब तीन माह पहले सरिया से ओवरलोड ट्राॅली से बाइक सवार दंपती टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। निगोही में 13 मई को छात्र-छात्राओं को लेकर जा रही एक स्कूल बस हाईवे के हमजापुर चौराहा से आगे सीमेंट से ओवरलोड और ओवरहाइट ट्राॅली से टकरा कर खाई में पलट गई थी। बस चालक और कई बच्चे घायल हुए थे।
तीन महीने में सिर्फ नौ ट्रैक्टर के चालान
परिवहन विभाग ने अप्रैल से अब तक नौ ट्रैक्टरों के चालान किए हैं। नियम तोड़ने पर छह ट्रैक्टरों को सीज कर थाने में खड़ा कराया गया है।
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लगातार संबंधित विभागों को नियमों का उल्लंघन करने वालीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और हाईवे पर चलने वाले ई-रिक्शा पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाता है। ट्रैक्टर ट्रॉलियों व ई-रिक्शा के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने के साथ संबंधित की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
-रजनीश मिश्रा, एडीएम प्रशासन
कृषि कार्य में प्रयोग होने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यावसायिक उपयोग होते मिलने पर कार्रवाई की जाती है। इनके लिए निरंतर अभियान चलाकर चालान भी किए जाते हैं।
-हरिओम, एआरटीओ प्रवर्तन
निगोही में लिपुलेख भिंड हाईवे पर ग्राम पतराजपुर के पास सामान और सवारी बैठाकर दौड़ता ई-रिक्शा।
निगोही में लिपुलेख भिंड हाईवे पर ग्राम पतराजपुर के पास सामान और सवारी बैठाकर दौड़ता ई-रिक्शा।
निगोही में लिपुलेख भिंड हाईवे पर ग्राम पतराजपुर के पास सामान और सवारी बैठाकर दौड़ता ई-रिक्शा।