कहने को तो शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन को ‘ए’ ग्रेड मिला हुआ है, लेकिन यहां की चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं देखकर ऐसा नहीं लगता। रेलवे अस्पताल की दशा किसी से छिपी नहीं है। चिकित्साधिकारी सप्ताह में चार दिन यहां से नदारद रहते हैं। ऐसे में अस्पताल का जिम्मा फार्मासिस्ट पर होता है। चिकित्साधिकारी पर शाहजहांपुर के साथ रोजा और बालामऊ स्टेशनों का भी चार्ज है। स्टाफ की भी किल्लत है। रेलवे के कर्मचारी और उनके परिवार के लोगों को बीमार होने पर दूसरे अस्पतालों की दौड़ लगानी होती है।
शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन स्थित उत्तर रेलवे का स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टर के 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं दे रहा है, लेकिन यह सेवाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। गंभीर मरीज को यहां से सीधे रेफर कर दिया जाता है। इन दिनों प्रतिदिन ओपीडी में 25-30 मरीज मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्साधिकारी डॉ. संजय राज की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट राहुल मरीजों को देखते हैं। रेलवे अस्पताल में सिर्फ एक बेड की सुविधा है। इमरजेंसी के नाम पर यहां सिर्फ एक ऑक्सीजन सिलेंडर ही नजर आता है। आने वाले तीमारदारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। महिला डॉक्टर की तैनाती न होने की वजह से ‘ए’ ग्रेड के रेलवे स्टेशन के रेल अस्पताल में प्रसव तक की सुविधा नहीं है।