भावलखेड़ा। पांच साल पूर्व रोजा में मोबाइल की दुकान में जले मिले आरसी मिशन के मोहल्ला फत्तेपुर रेती निवासी अभिषेक यादव के शव के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के दो माह बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। नामजद आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। साक्ष्य संकलन के लिए विशेष फोरेंसिक टीम, लखनऊ से पत्राचार किया गया था। टीम ने विवेचक को अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के साथ तलब किया है।
अभिषेक की मां सुमन ने 13 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया था कि 19 दिसंबर 2020 को रोजा क्षेत्र में एक दुकान में जला हुआ एक शव मिला। पहले पुलिस ने जानवर का शव समझकर फेंक दिया। अधिकारियों के दखल के बाद जांच कराई तो शव मानव का निकला। शव के पास मिले कड़े को देखकर सुमन ने शव बेटे अभिषेक का बताया।
दो माह पूर्व आई डीएनए रिपोर्ट में शव अभिषेक का होने की पुष्टि हुई। सुमन ने बताया था कि बेटा अभिषेक मोहल्ले के ही शानू के साथ रोजा क्षेत्र में स्थित एक ढाबे पर खाना खाने गया था। वहां बोलेरो चालक नईम व राजू से विवाद हो गया था। आरोप है कि दोनों ने पहले अभिषेक को पीटा, फिर हत्या कर शव को दुकान में डालकर आग लगा दी।
मृतक के भाई अंकित ने बताया था कि घटना वाले दिन अभिषेक के मोबाइल पर एक काॅल आई थी। इसके बाद भाई चला गया था। इंस्पेक्टर आरसी मिशन धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने खुलासे में गहनता से साक्ष्य संकलन के लिए लखनऊ की विशेष फोरेंसिक टीम को पत्र भेजा था। अब टीम ने विवेचक को अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के साथ लखनऊ तलब किया है। इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि फोरेंसिक टीम पहले यहां से जुटाए गए साक्ष्यों का अवलोकन करेगी, उसके बाद आगे की कार्रवाई करेगी।