फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahjahanpur News: बंदर के हमले में छत से नीचे गिरकर बालक की मौत

विज्ञापन
मृतक प्रशांत का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन
विज्ञापन
परौर (शाहजहांपुर)। कस्बा समेत आसपास के गांवों में आतंक का पर्याय बन चुके बंदरों के जानलेवा हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। क्षेत्र के दसिया गांव में रविवार को सुबह बंदरों के हमले में छत से गिरकर जसवीर सिंह के 11 वर्षीय प्रशांत की जान चली गई।
विज्ञापन

जसवीर ने बताया कि उनका पुत्र रविवार को सुबह नाश्ता करने के बाद छत पर बैठा धूप सेंक रहा था। इसी दौरान आसपास के मकानों की छतों से बंदर उनकी छत पर आ गए। प्रशांत पीछे से आए बंदरों को देख नहीं सका। इसी दौरान एक बंदर ने पीछे से उस पर हमला कर दिया। बंदर के धक्का देने से छत के किनारे बैठा प्रशांत सिर के बल छत से नीचे गिरकर बेहोश हो गया।

परिजन उसे लेकर इलाज के लिए तत्काल बदायूं के लिए रवाना हो गए, लेकिन उसावां के पास उसकी मौत हो गई। कलान के तहसीलदार सृजित कुमार ने बताया कि इस बारे में जारी शासनादेश के आधार पर मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


बंदरों को पकड़वाने की कई बार मांग कर चुके थे ग्राम प्रधान
परौर। दसिया गांव में बंदर के हमले में बालक प्रशांत की मौत ने एक बार फिर वन विभाग और ग्राम पंचायतों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कई गांवों में बंदरों का आतंक खत्म करने के लिए वहां के ग्राम प्रधान ब्लॉक से लेकर तहसील तक अधिकारियों से उन्हें पकड़े जाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। बालक की मौत से घरवालाें का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।
खास यह है कि बंदरों को पकड़कर उन्हें बाहर छोड़े जाने की जिम्मेदारी न तो वन विभाग ले रहा है और न ही ग्राम प्रधान। जब कभी बंदरों के हमले में कोई मौत होने अथवा किसी के घायल होने पर उन्हें पकड़े जाने की मांग की जाती है, तो वन विभाग शासन के आदेश का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से इन्कार कर देता है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बंदर वन्य जीव की श्रेणी में नहीं आते। नगर क्षेत्रों में उन्हें पकड़ने का दायित्व नगर निकायों और ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायतों को दिया गया है। दूसरी ओर, ग्राम प्रधानों का तर्क है कि इस काम के लिए ग्राम पंचायताें को अलग से कोई बजट स्वीकृत नहीं किया जा रहा है।
प्रशांत की मौत से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि बंदरों को कौन पकड़वाएगा। डिप्टी रेंजर शेर सिंह ने बताया यह मामला विभागीय कार्य क्षेत्र में नहीं आता है। नियमानुसार प्रधान के स्तर से पशु चिकित्सा विभाग में पत्राचार कर आगे की प्रक्रिया की जा सकती है। फिलहाल, प्रशांत की मौत से उसके घर में मातम पसरा है। वह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर का और सभी का लाड़ला था। उसकी मौत से पिता जसवीर सिंह, मां चहेती देवी, भाई अभिषेक और बहनों पारुल व दीपशिखा का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के तमाम लोगों ने उसके घर पर जाकर घटना पर शोक और क्षोभ व्यक्त करते हुए परिजनों को सांत्वना दी।
-
हाल में बंदरों के कारण हुईं घटनाएं
09 दिसंबर 2025 : जैतीपुर क्षेत्र के खेड़ारठ गांव में बंदरों की उछलकूद से गिरे मकान के छज्जे से दबकर 32 वर्षीय उमेश की मौत हो गई थी।
08 दिसंबर 2025 : कलान के मोहल्ला शिवनगर में बिजली उपकेंद्र के पास रहने वाले राजीव की पुत्री परी सोमवार को दोपहर घर की छत पर खेलते समय बंदरों का झुंड आता देख उनसे बचने के फेर में नीचे गिरकर घायल हो गई।
26 नवंबर 2025 : मीरानपुर कटरा के सिउरा गांव में छत पर खेल रहे शिवम के पुत्र अर्पित को बंदरों ने काट लिया। कसरक गांव में किशन लाल के पुत्र अभय गोस्वामी और बाबूपुर बुजुर्ग उर्फ नगरा गांव में रामनिवास के पुत्र कृष्णा को भी बंदरों ने काटकर लहूलुहान कर दिया। बंगशान मोहल्ले में छत पर कपड़े सुखाने गईं उस्मान खां की पत्नी बानो खानम बंदरों के झुंड से बचने के लिए भागीं तो छत से नीचे गिरने से पैर टूट गया।
विज्ञापन

04 नवंबर 2025 : रोजा के देवरास गांव में बंदरों की उछलकूद से छज्जा गिरने से जिलेदार सिंह के चार वर्षीय बेटे कार्तिक की मलबे में दबकर मौत हो गई थी।
22 सितंबर 2025 : बंदरों के हमले से छत से छज्जे समेत नीचे गिरे कांट थाना क्षेत्र के औधापुर गांव निवासी 50 वर्षीय आसाराम की मौत हो गई।
14 मई 2025 : निगोही में रेलवे कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय गुल्ले की बंदरों के हमले में छत से गिरकर मौत हो गई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें