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चंदा जमा करके हुआ मिल कर्मी का अंतिम संस्कार

Thu, 31 Jul 2014 05:31 AM IST
Shahjahanpur
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देयकों का भुगतान नहीं होने से पूर्व मिलकर्मियों में रोष
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- बिहार के जिला सीवान के गांव बलुआ के रहने वाले थे मनोहर
- चीनी मिल से बकाया मिलने की आस में पुवायां में किराये पर रहते थे
- पत्नी बोली, धनाभाव में बच्चों की पढ़ाई छूटी, अब रोटी के भी लाले
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। हार्ट अटैक से पूर्व चीनी मिल कर्मी की मौत के बाद साथियों और मोहल्ले के लोगों ने चंदा एकत्र कर उनका अंतिम संस्कार कर दिया। देयकों को भुगतान नहीं होने से पूर्व मिल कर्मियों में रोष है।
गौरतलब है कि पुवायां की किसान सहकारी चीनी मिल बंद होने के बाद तमाम कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी गई थी, लेकिन कर्मचारियों का बकाया वेतन सहित अन्य भुगतान नहीं किए गए थे। गत पेराई सत्र से मिल को फिर से चालू किया गया, लेकिन किसी भी पूर्व कर्मचारी को काम पर नहीं लगाया गया। मिल चलाने के लिए दिल्ली की एक कंपनी को ठेका दे दिया गया, जिससे कर्मचारियों को हताशा हाथ लगी। वेतन सहित अन्य देयकों के भुगतान होने की आशा में बाहर के तमाम कर्मचारी अभी भी पुवायां में रहते हैं। तमाम बार मांग के बाद भी सुनवाई नहीं होने से उनके परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
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बिहार के जिला सीवान के गांव बलुआ के मनोहर भी मिल में काम करते थे। वह भी चीनी मिल से बकाया मिलने की आस में पुवायां में किराये पर रहते थे। मंगलवार को अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें शाहजहांपुर ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इससे परिवार में कोहराम मच गया। बुधवार को मनोहर के पुराने साथियों और अन्य लोगों ने चंदा एकत्र कर उनका अंतिम संस्कार कर दिया। मनोहर अपने पीछे पत्नी चंपा देवी, पुत्री पूजा, सपना सहित पांच लोगों को छोड़ गए हैं। मनोहर की मौत से परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल है। मृतक की पत्नी ने बताया धनाभाव में परिवार भुखमरी की कगार पर है। बच्चों के एडमीशन नहीं होने के कारण पढ़ाई बंद हो गई है।




चीनी मिल के जीएम ने की मदद
पूर्व मिल कर्मी मनोहर की मौत की जानकारी पाकर सहकारी चीनी मिल पुवायां के जीएम एएस पोरस कर्मचारी के घर पहुंचे और दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि मृतक के एक पुत्र को मिल में संविदा पर नौकरी भी दी जाएगी। इसके अलावा मिल के तमाम पूर्व कर्मचारी भी मृतक के घर पहुंचे और परिवार के लोगों को सांत्वना दी। किसी भी नेता और जनप्रतिनिधि ने कर्मचारी के परिवार को सहायता और सांत्वना देने की जरूरत नहीं समझी है।




कितने मनोहर की जान जाने
के बाद मिलेगा भुगतान
चीनी मिल पर कर्मचारियों का 1609.55 लाख रुपया बकाया
- विधानसभा में सरकार ने दी थी जानकारी
- कहा था, सहकारी चीनी मिल संघ करेगा भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। सरकार ने विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में माना था कि पुवायां की किसान सहकारी चीनी मिल पर कर्मचारियों का 1609.55 लाख रुपया बकाया है और सहकारी चीनी मिल संघ इस राशि का भुगतान करेगा, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
गौरतलब है कि घाटे के चलते पुवायां की किसान सहकारी चीनी मिल बंद हो गई थी। इसके बाद वर्ष 11 में मिल के 456 कर्मचारियों को वीआरएस दे दिया गया था। मिल के 49 कर्मचारी दूसरी सहकारी मिलों से संबंद्ध कर दिए गए थे। वीआरएस के समय कर्मचारियों का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया। वीआरएस के समय मिलने वाला कंपेशन भत्ता, स्थाई कर्मचारियों का लगभग 16 माह का बकाया वेतन, भविष्य निधि, कर्मचारी अंशदान, दो वर्ष का बैठकीय भत्ता, दो सत्रों को बोनस, अवशेष ओवी टाइम आदि का भुगतान कर्मचारियों को नहीं किया गया।
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उक्त देयकों का भुगतान मिलने की आशा में तमाम कर्मचारी पुवायां में ही रुके हुए हैं। कई बार मांग के बाद भी किसी अधिकारी और नेता ने कर्मचारियों की मदद करने की जरूरत नहीं समझी है। इस कारण कर्मचारियों के परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। वर्ष 13 में विधानसभा के प्रथम सत्र की बैठक में एमएलए राजेश त्रिपाठी ने इस मामले को उठाया था। इस पर उन्हें लिखित जवाब देकर बताया गया था कि कर्मचारियों के वीआरएस के पूर्व देयकों की राशि 1609.55 लाख रुपए का भुगतान सहकारी चीनी मिल संघ की ओर से किया जाएगा। श्री त्रिपाठी के प्रश्न यदि भुगतान नहीं किया गया तो के संबंध में जवाब दिया गया था कि ऐसा प्रश्न ही नहीं उठता है। अब सवाल है कि आखिर कितने मनोहर की जान चली जाने और परिवार में बिखर जाने के बाद कर्मचारियों का पुराना भुगतान किया जाएगा।
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