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रिवाली परेड देख सिहर उठे लोग

Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
Shahjahanpur
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पाकिस्तानी बार्डर हुसैनीवाला पर हर रोज जुटते हैं हजारों आम-ओ-खास
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- देखते ही बनती थी सीमा सुरक्षा बल के जवानों की चुस्ती-फुर्ती
- रोमांचक पलों ने पीछे छोड़ दिया भारत-पाकिस्तान का भी मैच
अजय अवस्थी
शाहजहांपुर। यही कोई शाम के साढ़े पांच बजे होंगे, जब मैं अपनी दोनों बेटियों के साथ फिरोजपुर (पंजाब) से बिल्कुल सटी हुसैनीवाला पाकिस्तानी सीमा पर पहुंचा। साथ में बेटी की सहपाठी और उसके पापा भी थे। मौका था रिवाली परेड (दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज उतारने की विशेष परेड) प्रदर्शन का। परेड देखने के लिए दोनों देशों के हजारों आम-ओ-खास बार्डर पर एकत्र हो चुके थे, कुछ वीआईपी का इंतजार हो रहा था। छोटे से स्टेडियमनुमा मैदान में सफेद लाइन से बंटी सीमा के उत्तर साइड में हिंदुस्तानी और दक्षिण की ओर पाकिस्तानी नागरिक हो-हल्ला मचा रहे थे।
हिंदुस्तानी सीमा में बने छोटे से भवन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पाकिस्तानी बिल्डिंग में जिन्ना का फोटो लगा था। दोनों देशों के देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्मी नगमें सैनिकों और दर्शकों में जोश भरने का काम कर रहे थे।
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‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी’, ‘ये देश है वीर जवानों का’, ‘इश्क है मुझे सरजमीं से’ जैसे फिल्मी तरानें भारतीय सीमा में गूंज रहे थे, जिन्हें सुनकर बीच-बीच में भारतीय दर्शक पाकिस्तानियों की ओर देखकर शोर मचाने लगते थे, यही काम दूसरी ओर से भी हो रहा था। जैसे ही भारतीय घड़ी ने छह और पाकिस्तानी घड़ी ने साढ़े पांच बजने का संकेत दिया कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल के जवानों की टुकड़ी परेड के लिए एक ओर खड़ी हो गई और दूसरी ओर पाकिस्तान की। चकाचक खाकी वर्दी और शानदार पगड़ीनुमा टोपी से सजे-धजे भारतीय जांबाज लोगों को रोमांचित कर रहे थे। पक्के फर्श पर सैनिकों के बूटों की आवाजें दर्शकों की तालियों और शोर के साथ गूंज रहीं थीं।
इसके बाद यही सिलसिला काले रंग की वर्दी पहने पाकिस्तानी सैनिकों की ओर से भी चलाया गया। दोनों देशों के सैनिकों की परेड लोगों में जबरदस्त जोश पैदा कर रही थी। करीब आधा घंटे की परेड के बाद दोनों देशों की ओर से एक-एक सैनिक आगे बढ़ा और राष्ट्रीय ध्वज उतारने को बिगुल बजाना आरंभ कर दिया।
इसके बाद मैत्रीभाव प्रदर्शित करते हुए भारत और पाकिस्तान के एक-एक सैनिक ने राष्ट्रीय ध्वज की डोरी थामकर एक-दूसरे की सीमा में बड़ी ही फुर्ती के साथ प्रवेश किया और सम्मान पूर्वक ध्वज उतारना आरंभ कर दिया। इसके पश्चात उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज अपने अधिकारी को सौंपा।
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एआर रहमान के प्रख्यात फिल्मी गीत ...जय हो की धुन एक बार फिर फिजां में गूंजने लगी। वहां जुटे युवक-युवतियों ने सैनिकों से भेंट भी की, उनका उत्साह बढ़ाया और फिर उन्हें अपने कैमरे और मोबाइल में कैद करना आरंभ कर दिया। लगभग तीस मिनट के इन रोमांचक पलों ने भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच को भी पीछे छोड़ दिया था।
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