परौर क्षेत्र के गांवों का हाल
- शाहजहांपुर, बदायूं, बरेली, फर्रुखाबाद की सीमा पर पड़ता है मंझा घाट
- जनप्रतिनिधियों ने पुल तो दूर, नहीं की एक नाव तक की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
परौर। क्षेत्र की जनता रामगंगा के मंझाघाट पर टूटी नाव से यात्रा करने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों की ओर से पुल तो दूर एक नाव तक की व्यवस्था नहीं की है।
ज्ञात रहे कि परौर क्षेत्र के अधिकतर गांव रामगंगा के किनारे बसे हुए हैं। मंझा घाट पर दूर-दूर से आने वाले लोगों की भीड़ रहती है। क्योंकि यह घाट शाहजहांपुर, बदायूं, बरेली, फर्रुखाबाद की सीमा पर पड़ता है। इस घाट पर चलने वाली नाव इतनी पुरानी है कि कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, जो चुनाव के समय जनता के सुख दुख में साथ रहने का वायदा करते हैं, जनता की एक छोटी सी समस्या भी हल करने में बौने साबित हो रहे हैं। जनता का कहना है कि यदि मंझा घाट पर नाव की व्यवस्था न कराई गई तो किसी भी दिन बड़ी घटना घटित हो सकती है, क्याेंकि क्षेत्र के किसान और विभिन्न स्थानों पर जाने वाले यात्री इसी नाव से रामगंगा पार करते हैं। क्षेत्र के लोग अरसे से इस घाट पर पक्के पुल की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र की जनता अपनी जान की परवाह न करके इस नाव से मजबूरी में यात्रा करती है।
क्षेत्र के सत्येंद्र पाल सिंह राजीव सिंह, शीलबाबू गुप्ता, संतोष कुमार गुप्ता, उदयवीर सिंह, मोनूसिंह चंदेल, हरिनाथ सिंह आदि ने नाव की व्यवस्था कराए जाने की मांग की है।
उधर, एसडीएम जलालाबाद हरीशंकरलाल शुक्ल ने बताया कि यदि कहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र या किसी नदी पर विशेष नाव की आवश्यकता है तो ऐसी परिस्थिति में ग्राम प्रधान की मांग पर नाव उपलब्ध कराई जा सकती है। नाव का संचालन नि:शुल्क रहेगा तथा नाव ग्राम प्रधान की सुपुर्दगी में रहेगी।