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‘...कुछ ऐसा हो कि महिलाओं में जगे आत्मविश्वास’

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शाहजहांपुर। महिलाओं पर बढ़ रहे छेड़छाड़, दुष्कर्म के मामलों को लेकर बृहस्पतिवार को एडीजी कार्मिक नीरा रावत पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यशाला में बरेली जोन के अधिकारियों व शहर के संभ्रांत नागरिकों से रूबरू हुईं। इस दौरान उन्होंने संभ्रांत नागरिकों से महिलाओं पर हो रहे अपराधों पर अंकुश लगाने को लेकर सुझाव भी मांगे। एडीजी नीरा रावत को बरेली और मेरठ जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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उन्होंने बताया कि सरकार महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर है और इसलिए महिला सुरक्षा को और बल देते हुए जहां एंटी रोमियो का गठन किया गया, वहीं कार्यशाला के जरिये इन अपराधों पर अंकुश लगाए जाने के सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोगों के इन सुझाव को वह 15 मार्च को डीजीपी की होने वाली बैठक में रखेंगी ताकि महिला सुरक्षा की बेहतरी को लेकर और भी बेहतर तरह से काम हो सके। इसके बाद उन्होंने संभ्रांत नागरिकों से उनके सुझाव लेने शुरू किए। सबसे पहले रेती निवासी संतोष शुक्ला ने बात रखते हुए कहा कि सबसे पहले हमें खुद जागना होगा। उन्होंने कहा कि अपराध की घटनाएं शहर और गांव दोनों जगह हो रहीं हैं। ऐसे में पुलिस के साथ मिलकर समाज की एक ऐसी कमेटी बने जो युवाओं की भावनाओं को समझते हुए उन्हें हर स्तर पर समझाकर अच्छे-बुरे का ज्ञान कराए। यह बेहद जरूरी है। वहीं एसएस लॉ कालेज की असिस्टेंट प्रोफेसर रंजना खंडेलवाल ने सुझाव रखते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेज में सेमिनार होने चाहिए। उसमें छात्राओं को यह पता लगे कि उन्हें 1090 हेल्पलाइन, एंटीरोमियो, 181 पर किस तरह से शिकायत करनी है। इससे उनमें एक आत्मविश्वास जाग्रत होगा और वह खुद को सुरक्षित महसूस करने के साथ ही आसानी से शिकायत कर सकेंगी। व्यापारी नेता सुरेंद्र सेठ ने कहा कि बच्चों को छोटे पर से ही अच्छे-बुरे का ज्ञान कराएं और इस काम में स्कूल कॉलेज की अहम भूमिका होनी चाहिए। महेंद्र चावला ने कहा कि स्कूल में एक शिकायत पेटिका होनी चाहिए, जिसमें कोई भी छात्रा अपनी शिकायत डाल सके और वहां भी कॉलेज प्रशासन के साथ मिलकर पुलिस उसकी जांच कर समस्या का निस्तारण कर सके। कार्यशाला में डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि महिला अपराधों पर पुलिस की भूमिका सख्त होनी चाहिए, अक्सर देखा गया है कि थाने पर पहुंचने वालीं महिला से पुरुष पुलिस कर्मी चुभते हुए सवाल करते हैं। महिला पुलिस कर्मी प्रत्येक थाने में महिलाओं की फरियाद सुने। इस पर एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने कहा कि प्रत्येक थाने पर महिला ड्यूटी आफीसर की तैनाती की गई है। कार्यशाला में किशोर गुप्ता, तराना जमाल, सचिन बाथम, राजीव खन्ना आदि ने भी सुझाव दिए।

तीन तलाक मामलों को भी गंभीरता से पुलिस
बरेली की फरहत नकवी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक बोलकर पुरुष धर्मगुरु से तो फतवा ले आते हैं, लेकिन यह धर्म गुरु महिलाओं से नहीं पूछते हैं। उन्होंने कहा कि वह मेरा हक फाउंडेशन चलाती हैं और इसी फाउडेंशन के तहत वह तीन तलाक व दहेज उत्पीड़न के मामलों को लेकर पंचायत लगाती हैं, लेकिन इसमें उन्हें पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिलता।
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