फोटो-24,नदी किनारे बैठे परिवार के लोग और कोतवाल
फोटो-25,नदी में डूबे युवक की बड़ी बहन को संभालते घरवाले
फोटो-26,चंद्रपाल की फाइल फोटो
मानसिक रूप से परेशान युवक रामगंगा नदी में कूदा
एकलौते पुत्र के नदी में कूदने की जानकारी पर मचा कोहराम
दो गांवों के 18 गोताखोर उसे खोजने के लिए नदी में उतरे
अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद। शनिवार शाम मानसिक रूप से परेशान एक युवक ने गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर जाकर रामगंगा नदी में छलांग लगा दी। उसे तलाशने के लिए करीब 18 गोताखोर लगे रहे लेकिन उसका रविवार शाम तक पता नहीं लगा। इस अनहोनी से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। वहीं बीती शाम से घर में चूल्हा भी नहीं जला।
कोतवाली क्षेत्र के गांव भुलभुलागंज निवासी सुंदरलाल का पुत्र 29 वर्षीय चंद्रपाल पुत्र बीएससी करने के बाद नौकरी न मिलने पर वह प्राइवेट नौकरी कर काम चला रहा था। जरूरतें पूरी न होने पर वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। परिजन करीब एक साल से उसका इलाज भी करा रहे थे। शनिवार शाम करीब छह बजे वह घर से निकलने में बाद काफी देर तक वापस नहीं लौटा तब परिजनों ने उसे इधर-उधर तलाशना शुरू किया। उधर, गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर रामगंगा नदी पर हैदलपुर घाट के पास नाव चलाने वाले ने उसके गांव के कुछ लोगों को बताया कि जब वह नदी के उस तरफ नाव लेकर सवारियों के इंतजार में खड़ा था तभी एक युवक ने नदी में छलांग लगा दी। इसके बाद वह तुरंत ही वहां पहुंचा लेकिन उसका कुछ पता नहीं लगा। यह बात पता लगने पर सुंदर लाल ग्रामीणों के साथ बताए गए स्थान पर पहुंचे तो वहां पर बेटे चंद्रपाल के जूते रखे हुए थे। अनुमान है चंद्रपाल ने नदी में छलांग लगाने से पहले जूते उतार दिए थे। पिता ने पुलिस को सूचना देने के साथ ही मिर्जापुर और पंखाखेड़ा गांव से गोताखोरों को बुलाकर चंद्रपाल की नदी में तलाश शुरू करा दी लेकिन रविवार शाम तक उसका पता नहीं लगा।
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इकलौता बेटा है चंद्रपाल
तीन बहनों के बीच चंद्रपाल इकलौता भाई था। उसकी शादी करीब छह साल पहले कांतिदेवी के साथ हुई थी। शादी के बाद चंद्रपाल को दो बेटियां हुईं, जिनमें 5 वर्षीय रिया और दो वर्षीय अनुष्का है। परिजनों के अनुसार उसकी पत्नी मायके में थी घटना की जानकारी मिलते ही वह ससुराल आ गई।
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बड़ी बहन ने की थी परवरिश
करीब 26 साल पहले जब सुंदरलाल की पत्नी की मौत हुई तब चंद्रपाल मात्र तीन साल का था। बड़ी बेटी रामदेवी की शादी हो चुकी थी मां की मौत हो जाने पर रामदेवी अपने छोटे भाई बहनों को परवरिश के लिए अपने साथ ससुराल लेकर चली गई थी चंद्रपाल ने अपनी पढ़ाई भी उसी के घर पर रहकर की। वह बहन रामदेवी के काफी करीब था। इस अनहोनी की खबर पाकर रामदेवी मायके पहुंच गईं हैं।
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