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गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर बैक फुट पर आई योगी सरकार

Tue, 27 Mar 2018 08:44 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,शाहजहांपुर
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गत वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार से उत्साहित प्रदेश सरकार ने सूबे के अन्य जनपदों की तरह जिले के खरीद लक्ष्य में दोगुनी बढ़ोत्तरी कर दी थी। इस आधार पर पिछले साल जिले में 5.03 लाख मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य नियत किया गया, लेकिन नगद भुगतान पाने के लिए किसानों ने समर्थन मूल्य से कम रेट पर अधिकांश उपज खुले बाजार में गल्ला आढ़तियों के हवाले कर दी। इस कारण सरकारी क्रय केंद्रों पर केवल 1.82 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंचा। नतीजा यह हुआ कि बैक फुट पर आई प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में जिले के लिए केवल 2.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है, जो गत वर्ष के लक्ष्य की तुलना में 52 फीसदी कम है। हालांकि, खरीद का यह लक्ष्य पिछले साल सरकारी सेक्टर में हुई वास्तविक खरीद की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक है।
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क्रय केंद्रों के निर्धारण में पीसीएफ को मिली सर्वोच्च वरीयता
एक अप्रैल से आरंभ होकर 15 जून तक प्रभावी रहने वाली गेहूं की सरकारी खरीद के लिए क्रय केंद्रों के निर्धारण में हमेशा की तरह इस बार भी राज्य सहकारी संघ (पीसीएफ) को सर्वोच्च वरीयता दी गई है। फिलहाल विभिन्न तहसीलों में क्रय एजेंसियों को 131 क्रय केंद्र आवंटित किए गए हैं। विपणन विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार निकट भविष्य में क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ना तय है, लेेकिन केंद्र निर्धारण के पहले चरण में पीसीएफ नेे बाजी मार ली है। इस एजेंसी को कुल 61 क्रय केंद्र दिए गए हैं। दूसरे स्थान पर 25 क्रय केंद्रों के साथ खाद्य विभाग को रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार किसानों की सुविधा को देखते हुए आठ किमी की परिधि में केंद्र स्थापना की सरकारी नीति के अनुपालन में सहकारी समितियों को भी 1735 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद करने का दायित्व दिया जा सकता है।

72 घंटे में किसानों के खातों में ट्रांसफर होगा गेहूं का भुगतान
गत वर्ष शासन ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल नियत किया था, लेकिन इसके साथ ही क्रय केंद्रों पर उपज लाने वाले किसानों पर कई बाध्यताएं भी थोप दी थीं। इनमें किसान बही समेत खसरा-खतौनी प्रपत्र साथ लाना अनिवार्य किया गया। इसके बावजूद बिचौलियों से खरीद को केंद्र प्रभारियों द्वारा प्राथमिकता दिए जाने के कारण किसानों को अपना गेहूं तुलाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रालियां लेकर कई दिन इंतजार करना पड़ा। इन सभी वजहों के चलते किसानों का समर्थन मूल्य से मोहभंग हुआ तो वे आढ़तों पर पहुंचने लगे। अतीत में किसानों को हुई इन सारी कठिनाइयों से सबक लेते हुए इस बार योगी सरकार ने गेहूं खरीद नीति में कई अहम बदलाव किए हैं। उदाहरणार्थ, किसानों के उपलब्ध राजस्व रिकार्ड के आधार पर गेहूं खरीदा जाएगा और उसका भुगतान तीन दिन के अंदर आरटीजीएस के माध्यम सेे उनके बैंक खातों में भेज दिया जाएगा।
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