शाहजहांपुर। ग्रामीण क्षेत्रों के बिजली उपभोक्ताओं को जारी हुए गलत बिलों से छुटकारा दिलाने को शासन के निर्देश पर आगामी एक अप्रैल से दो माह तक बिलों में सुधार का अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान से बिजली कनेक्शन धारकों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी, लेकिन इससे राजस्व की वसूली को चलाया जा रहा विशेष अभियान ग्रामीण अंचल में प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विभागीय अभियंताओं का मानना है कि बिल सुधार अभियान की आड़ लेकर वे लोग भी बकाया जमा करने से कतराएंगे, जिनके बिलों मेें कोई त्रुटि नहीं है।
बिजली वितरण व्यवस्था के लिहाज से जिले को तीन डिवीजनों में बांटा गया है। शहरी वितरण खंड द्वितीय को छोड़कर प्रथम खंड में जिले की सभी तहसीलें शामिल थीं। दो साल पहले विद्युत वितरण खंड प्रथम से तिलहर डिवीजन को पृथक करके उसमें जलालाबाद तहसील के उपभोक्ता भी शामिल कर लिए गए। वर्तमान में प्रथम खंड से सदर और पुवायां तहसील के उपभोक्ता जुड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्र के इन दोनों डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजनों में प्रतिमाह औसतन 16 करोड़ रुपये की बिजली खपत हो रही है। सिर्फ वितरण खंड प्रथम में हर माह 8.5 करोड़ रुपये की बिजली जलाई जा रही है।
1.40 अरब रुपये बकाया के सापेक्ष मिले सिर्फ 4.5 करोड़ रुपये
देहात क्षेत्र को बिजली सप्लाई करने वाले दोनों वितरण खंडों के उपभोक्ताओं पर लगभग 1.40 अरब रुपये बिजली राजस्व पिछला बकाया है। इस बीच, प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में मुफ्त कनेक्शन योजना और हर घर में बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना लागू किए जाने से कनेक्शन बढ़ने के अनुपात में बिजली खपत भी बढ़ रही है। नतीजे में बकाया मद में भी बढ़ोत्तरी हो रही है क्योंकि बमुश्किल 50 फीसदी उपभोक्ता ही बिलों की नियमित अदायगी कर रहे हैं। वितरण खंड प्रथम में हर माह उपभोक्ता 8.5 करोड़ रुपये की बिजली जला रहे हैं। चूंकि, उन पर करीब 75 करोड़ रुपये पिछला बकाया है। इसलिए मासिक उपभोग के सापेक्ष पिछले बकाया की कुछ धनराशि जोड़कर प्रथम खंड को हर माह 12 से 13 करोड़ रुपये वसूली लक्ष्य दिया जाता है। इसके बावजूद चालू मार्च माह में अभी तक बमुश्किल 2.5 करोड़ रुपये बिजली राजस्व मिल सका। राजस्व वसूली की यही लचर स्थित तिलहर डिवीजन में बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के बिलों में सुधार की योजना के बारे में अभी शासन से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। बिजली के बिलों में सुधार कर उनकी त्रुटियों से उपभोक्ताओं को राहत दिलाना एक सतत प्रक्रिया है। बिलों की अदायगी के दौरान उपभोक्ताओं की आपत्तियों का निस्तारण लगातार कराया जा रहा है।
-राजेंद्र प्रसाद, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन
सरचार्ज में छूट का लालच रोक रही बिलों की अदायगी
शाहजहांपुर। बकाया बिलों के भुगतान का ग्राफ बढ़ाने के लिए पॉवर कारपोरेशन हर साल एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस स्कीम) लागू करता है। इस स्कीम मेें उपभोक्ताओं को बकाया बिजली राजस्व पर देय ब्याज पर छूट का लाभ मिलता रहा है। नतीजे में तमाम उपभोक्ताओं ने मासिक बिल जमा करने के बजाय सरचार्ज पर छूट का लाभ पाने को ओटीएस स्कीम में बिल जमा करने की परंपरा बना ली। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन ने शासन के निर्देश पर दो साल से ओटीएस स्कीम लागू नहीं की। उपभोक्ताओं पर विभाग की देनदारी बढ़ने का यह खास कारण रहा है। इससे निपटने के लिए विभाग ने कनेक्शन चेकिंग अभियान शुरू करने के साथ एक लाख रुपये और इससे अधिक के बड़े बकाएदारों को आरसी के नोटिस जारी करने और एफआईआर कराने का अभियान छेड़ा, लेकिन प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने बिल सुधार अभियान शुरू करने के निर्देश दिए जाने से वसूली अभियान को झटका लगना तय माना जा रहा है। वितरण खंड प्रथम के एक्सईएन आरबी यादव के अनुसार बिल सुधरवाने की चाहत में उपभोक्ताओं से वसूली पर कुछ फर्क जरूर पड़ेगा।