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कामयाबी के लिए अध्ययन और अभ्यास बेहद जरूरी

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कामयाबी के लिए अध्ययन-अभ्यास जरूरी
फिल्म और टीवी कलाकार अनुपम श्याम ओझा से बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
फिल्म और टीवी कलाकार अनुपम श्याम ओझा का कहना है कि सिर्फ कलाकारों को ही नहीं, बल्कि नाट्य निर्देशकों को भी अध्ययन की बहुत जरूरत है। बिना इसके कोई भी न तो कहानी की तह तक जा सकता है और न ही कहानी के अनुरूप स्वयं को ढाल सकता है। इसके अलावा अपने किरदार को सशक्त बनाने के लिए कड़ा अभ्यास बहुत जरूरी है।
अनुपम श्याम ओझा रुहेलखंड उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित आए थे। एक होटल में मीडिया से रू-ब-रू होते हुए कहा कि रंगमंच पंचम वेद माना गया है। इसलिए मानसिक और शैक्षिक विकास होता है। हालांकि अब यह बातें युवा पीढ़ी मानने को तैयार नहीं है। युवाओं की हालत यह है कि वह दो-चार नाटक खेलने के बाद अपने का सलमान खान और आमिर खान समझने लगता है। यही भावना उसे आगे नहीं बढ़ने देती। फिल्मों की कहानी पर कहा कि कुछ विवादित फिल्मों को छोड़ दें तो अधिकांश फिल्में दर्शकों को खिड़की तक नहीं खींच पा रही हैं। हमारे मनोरंजन में कहां कमी हो रही है, इस पर निर्माता-निर्देशकों को सोचना पड़ेगा।
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युवाओं ने किताबों के बजाय गूगल को अपना गुरू बना रखा है। इससे बहुत नुकसान हुआ है। लिटिल बुद्धा, बैंडिट क्वीन, लगान, शक्ति द पॉवर, हल्ला बोल, श्रम डाग मिलेनियम जैसी तमाम फिल्मों और अम्माजी कहिन तथा प्रतिज्ञा जैसे धारावाहिकों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले अनुपम श्याम ओझा कहते हैं कि वह हमेशा अच्छे काम का प्रयास करते हैं और अपने काम को स्वयं पसंद नहीं करते। इस समय वह जंक्शन बनारस बौर एंड काउंटर फिल्में कर रहे हैं, जिनकी शूटिंग जारी है।
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उन्होंने कहा कि रंगमंच के दिन आज से बहुत अच्छे थे। तब संतुष्टि थी, लेकिन अब संतुष्टि उतनी नहीं है। उन्होंने थियेटर से जुड़े युवाओं का आह्वान किया कि वह मंच पर जी भरकर खेलें, क्योंकि नाटक खेला जाता है, कोई अनावश्यक टेंशन न पालें। अभिनय को तराशने के लिए अभ्यास पर अधिक जोर दें। इससे पहले नाटक की कथावस्तु, साथियों के किरदार को समझने का पूरा प्रयास करें।
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