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वृद्धावस्था पेंशन घोटाला: अपात्रों से आहरित धनराशि की होगी वसूली

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पेंशन घोटाला: अपात्रों से आहरित धनराशि की होगी वसूली
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शाहजहांपुर। पेंशन चाहे वृद्धावस्था की हो, दिव्यांगों की अथवा निराश्रित महिलाओं और विधवाओं की। तथ्यों को छिपाकर उनका गलत तरीके से लाभ लिया जाना जिले के लिए कोई नई बात नहीं है। अहर्ता आयु पूरी नहीं होने के बावजूद 60 साला पेंशन आहरित कर लिए जाने की विभिन्न गांवों से मिल रहीं शिकायतों का संज्ञान लेते हुए डीएम अमृत त्रिपाठी के निर्देश पर एक बार पहले भी अपात्रों की विधानसभा क्षेत्र वार जांच की जा चुकी है। चालू वित्त वर्ष में जांच के दौरान विभिन्न विकास खंडों में करीब 2500 ऐसे केस पाए जा चुके हैं, जिनमें लाभार्थी की मृत्यु के बाद उनके आश्रित वृद्धावस्था पेंशन लाभ लेते रहे। हालांकि, मृतकों की पेंशन बंद की जा चुकी है, लेकिन सेक्टर मजिस्ट्रेट स्तर से पेंशन लाभार्थियों की सत्यापन प्रक्रिया अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार पेंशन घोटाले में लाभार्थियों का सत्यापन करने वाले पंचायत सचिवों पर विधिक कार्रवाई के साथ ऐसे लोगों से धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी, जिन्होंने तथ्यों को छिपाकर अथवा उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत कर पेंशन आहरित की है।
समाज कल्याण विभाग के माध्यम से जिले के विभिन्न विकास खंडों में 60 वर्ष और इससे अधिक आयु के 81067 बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत हुई है। इसी तरह दिव्यांगजन कल्याण विभाग की ओर से शारीरिक रूप से अशक्त लगभग 19000 दिव्यांगों और प्रोबेशन विभाग की ओर से 39579 निराश्रित विधवाओं को विधवा पेंशन स्वीकृत हुई है। नए लाभार्थियों को पेंशन आहरण शुरू होने के साथ ही गांव स्तर पर अपात्रों को चयनित किए जाने की शिकायतें भी उठने लगीं। इन्हीं शिकायतों की अब तक हुई जांचों के आधार पर कई महिलाओं समेत शारीरिक रूप से स्वस्थ सक्षम लोगों की विधवा, दिव्यांग पेंशन रोकी जा चुकी हैं।
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कुछ ऐसी ही शिकायतों की गत वर्ष जुलाई में हुई जांच में ऐसे सैकड़ों लोगों की वृद्धावस्था पेंशन रोकी जा चुकी है, जिनकी मौत हो चुकी है या फिर जो लोग पेंशन को नियत अहर्ता आयु से कम उम्र के हैं और पते में दर्शाए गए मूल गांव में निवास भी नहीं करते। डीएम के निर्देश पर हुई जैतीपुर ब्लॉक के गांवों में जांच के दौरान वृद्धावस्था पेंशन में फर्जीवाड़ा के तमाम मामले उजागर हुए। इसलिए तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने पेंशन लाभार्थियों की जांच का अघोषित अभियान छेड़ दिया है। अधिकारियों का मानना है कि एक ब्लॉक क्षेत्र मेें इतनी अनियमितताएं सामने आने से अन्य विकास खंडों में पेंशन घोटाले होने से इनकार नहीं किया जा सकता और इसी बात को ध्यान में रखते हुए बूथ वार सेक्टर मजिस्ट्रेट नामित कर पेंशन लाभार्थियों की जांच कराई जा रही है।
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पेंशन घोटाला में लाभार्थियों का सत्यापन करने वाले पंचायत सचिवों समेत अन्य संबंधित कर्मचारियों पर विधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है। ऐसे लोगों से पेंशन मद में आहरित धनराशि की रिकवरी भी कराई जाएगी, जिन्होंने पात्रता नहीं होने के बावजूद तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से पेंशन धनराशि प्राप्त कर ली।
विनोद राम त्रिपाठी, प्रभारी सीडीओ
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