शाहजहांपुर/ सिंधौली। जिले में इमरजेंसी सेवा 108 और 102 एंबुलेंस खुद बीमार हो गई हैं। मरीजों को आकस्मिक चिकित्सा उपलब्ध कराने का सरकार का दावा हवाई साबित हो रहा है। जनपद में चल रहीं लगभग 54 एंबुलेंस में महज 15 से 18 ही रोड पर दिखाई दे रहीं है। बाकी डीजल न होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सफेद हाथी बनी खड़ी हैं।
जिले में इमरजेंसी सेवा देने को 54 एंबुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में तैनात हैं, लेकिन मरीजों को इस समय एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पा रही है। डीजल के पैसे न होने के कारण जिले की 50 फीसदी से ज्यादा गाड़ियां ऑफ रोड हैं। मरीजों को लाने और ले जाने का काम कुछ गाड़ियां ही कर रहीं हैं। इस कारण गांव देहात के मरीजों खासकर डिलीवरी के लिए इमरजेंसी में अस्पताल जाने वाली महिलाओं को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
पांच दिन से एंबुलेंस के डीजल कार्ड में नहीं हैं रुपये
एंबुलेंस को चलाने के लिए ईएमटी पायलट को एक कार्ड दिया गया है। उसके जरिये पेट्रोल पंप से इन लोगों को डीजल मिलता है, लेकिन इनके कार्डों में रुपये लखनऊ कार्यालय से डाले ही नहीं गए हैं। इसके बाद भी ईएमटी ने इमरजेंसी सेवाओं को बहाल रखने के लिए पेट्रोल पंप से डीजल उधार लेकर भी गाड़ियां चलाईं लेकिन अब पंप वालों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। एंबुलेंस को डीजल देने के लिए इंडियन ऑयल, एचपी, भारत पेट्रोलियम के पंपों से कंपनी का करार है। इस समय केवल एचपी के पंप से ही डीजल मिल पा रहा है। एचपी के पंप के कार्ड कुछ ही एंबुलेंस के पास हैं।
108 और 102 बन चुकी हैं लाइफ लाइन
108 और 102 एंबुलेंस इस समय लोगों की लाइफ लाइन बन चुकी हैं। ऐसे में इनका अचानक संचालन बंद होना दिक्कतों का पहाड़ है। चूंकि यह सीधे स्वास्थ्य विभाग के अंडर में नहीं आतीं इस कारण विभाग कोई भी कार्रवाई भी नहीं कर सकता है। इसमें जो कुछ भी कार्रवाई होगी वह ठेका कंपनी की ओर से ही होगी।
कलान में गाड़ी बंद होने की जानकारी मिली है। बाकी की जानकारी हमारे बड़े अधिकारी आशीष शुक्ला जी के पास है। आप उनसे संपर्क कर सकते हैं।
सलीम फरीदी, ईएमई, जीवीके एमआरआई
शाहजहांपुर में एंबुंलेंस में तेल नहीं है ऐसी कोई जानकारी मुझे नहीं है। मेरे हिसाब से वहां सब कुछ ठीक चल रहा है। अभी मैं आउट ऑफ स्टेशन हूं आकर देखता हूं क्या मामला है।
आशीष शुक्ला, मंडल अधिकारी ,जीवीके एमआरआई