वायरल बुखार, डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़े प्रकोप और इस बहाने आम नागरिकों के हो रहे भयादोहन पर शुक्रवार को पहली बार मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कमल कुमार एक्शन में आए। उन्होंने प्राइवेट चिकित्सकों, अस्पतालों और नर्सिंग होम को हिदायत दी कि एलाइजा टेस्ट द्वारा पुष्टि कराने के बाद पर रोगी को डेंगू से पीड़ित होने की पुष्टि करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनएस वन रैपिड किट टेस्ट से डेंगू की पुष्टि नहीं होती, जबकि ऐसी ही टेस्ट के आधार पर डेंगू बता दिया जा रहा है जो कि सर्वथा अनुचित है।
डॉ. कुमार ने कहा कि जिले में अब तक डेंगू के संभावित 16 रोगियों के नमूने लखनऊ रीजनल लैब में जंचवाए गए हैं जिनमें से छह में ही डेंगू पाजीटिव होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने जिला निवासियों से अपील की है कि बुखार आने पर घबराने की जरूरत नहीं है और किसी भी सामान्य बुखार में भी खून में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं लेकिन उसका मतबल डेंगू से प्रभावित होना नहीं है। चालू मौसम में हो रहे बुखार से बचाव के आसान उपाय कर बचा जा सकता है। बुखार आने पर पीड़ित को अधिक से अधिक पानी का सेवन कराएं एवं उसे आराम कराने के साथ ही निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। घरों में पानी को ढंककर रखें एवं सोते समय यथासंभव मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।