क्षेत्र के गांव चिलौआ में माता काली के पौराणिक मेला का शनिवार को समापन हो गया। शनिवार को मेला में भक्तों की काफी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने चुनरी, प्रसाद चढ़ाकर मनौतियां मांगी। लोगों ने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया।
माता काली के मेला के संबंध में कहा जाता है कि अज्ञातवास काल में पांडवों ने यहां माता काली की प्रतिमा की स्थापना की थी। माता काली के आशीर्वाद से ही महाभारत में पांडवों का विजय मिली थी। गांव के सर्वेश कुमार मिश्रा और शिक्षक दिनेश चंद्र शुक्ला बताते हैं कि यह मेला फर्नीचर, दरी, कालीन के लिए दूर-दूर तक पहचान रखता है। शनिवार को मेला में भक्तों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा प्रबंध भी किए गए। मेला की व्यवस्था मे प्रवेश मिश्रा, सर्वेश मिश्रा, बबलू पांडे, दिनेश शुक्ला, अम्बुज शुक्ला, लालाराम मिश्रा, विमल पांडेय, आलोक मिश्रा, कौशल किशोर त्रिपाठी, शिवराम त्रिपाठी, अवधेश सक्सेना, अश्वनी शुक्ला, गुलाब चंद्र त्रिपाठी आदि का सहयोग रहा।