शाहजहांपुर। वह उनके कोई नहीं लगते। उन्हें इस बात से भी सरोकार नहीं कि उनकी धमनियों का खून हिंदू की रगों में दौड़ेगा या मुसलमान की सेहत दुरुस्त करेगा। वह तो बस इसलिए हर तीसरे माह ब्लड बैंक आकर खून देते हैं कि उनके खून की एक बूंद किसी का जीवन बचा सकती है।
109 बार रक्तदान कर चुके इंजीनियर आरके अग्रवाल के चेहरे पर आज भी चमक बरकरार है। उनके इस जज्बे को सलाम करते हुए बुधवार को जिला अस्पताल में सीएमएस ने उन्हें प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। आरके अग्रवाल कहते हैं उनको रक्तदान करने का जुनून है। उन्हें पता है कि रक्त की एक एक बूंद कितनी कीमती है। कहते हैं मानव सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं होती है। प्रख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता मंदिर मस्जिद बैर कराते प्रेम कराती मधुशाला। कहते हैं कि एक और शाला है जो प्रेम ही जीवन भी देती है वह रक्तशाला। मधुशाला में भले ही कोई जाति धर्म पूछ ले पर रक्तशाला में इस बात से कोई मतलब नहीं होता है कि खून हिंदू का है या मुसलमान का बस जल्दी से मरीज को लग जाए और उसे राहत मिले। बस इसी सोच के चलते एक दो नहीं 109 बार रक्तदान कर चुके श्री अग्रवाल को सम्मानित किया गया।